राष्ट्रपति और पीएम संग बैठक में बंगाल ने शिक्षा नीति को लेकर जताई आपत्ति
राष्ट्रपति और पीएम संग बैठक में बंगाल ने शिक्षा नीति को लेकर जताई आपत्ति
पश्चिम-बंगाल

राष्ट्रपति और पीएम संग बैठक में बंगाल ने शिक्षा नीति को लेकर जताई आपत्ति

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कोलकाता, 07 सितम्बर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल ने केंद्र की शिक्षा नीति को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ 'धीमी चलो' की नीति के पक्ष में है। अभी इसे लागू करने के बजाय और चर्चा की जरूरत है। राज्य ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ एक बैठक में यह स्पष्ट किया है। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ आज की बर्चुअल बैठक में उपस्थित थे। उन्होंने कई मुद्दों पर आपत्ति भी जताई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना के दौरान यह मुख्य मुद्दा नहीं है। बाद में पार्थ चटर्जी ने एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। निर्णय एकतरफा लिया गया है। यह संघीय बुनियादी ढांचे के खिलाफ है। यह राज्य की शक्ति को कमजोर कर रहा है। मुझे अंत में बोलने का अवसर दिया गया। मैंने राष्ट्रपति से कहा है कि शिक्षा नीति के कई नियमों पर हमें आपत्तियाँ हैं। हमने कहा है कि उच्च शिक्षा का केंद्रीकरण और व्यवसायीकरण हो रहा है। इसके अलावा, पार्थ चटर्जी ने कहा कि शास्त्रीय भाषा में बंगला नहीं है। राष्ट्रगान की रचना करने वाले की भाषा को शास्त्रीय भाषाओं की सूची से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कड़ा विरोध कर रही है। राज्य सरकार जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेने के पक्ष में नहीं है। बिना चर्चा के अभी केंद्रीय शिक्षा नीति को लागू करने का कोई मतलब नहीं है। हमें पर्याप्त समय दें ताकि हम सभी से बात कर सकें और एक विस्तृत रिपोर्ट दे सकें। इस पर चर्चा करने में समय लगेगा। हिन्दुस्थान समाचार/ओम प्रकाश/सुगंधी-hindusthansamachar.in