कांग्रेस-माकपा ने ममता से किया चिटफंड निवेशकों की शिकायतों के निवारण  का अनुरोध
कांग्रेस-माकपा ने ममता से किया चिटफंड निवेशकों की शिकायतों के निवारण का अनुरोध
पश्चिम-बंगाल

कांग्रेस-माकपा ने ममता से किया चिटफंड निवेशकों की शिकायतों के निवारण का अनुरोध

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कोलकाता, 15 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार पर चिटफंड मामलों के संरक्षण का आरोप लगाते हुए माकपा और कांग्रेस ने गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फर्म मालिकों की संपत्तियां सीज कर निलामी की अपील की है। इससे मिलने वाली राशि को निवेशकों के बीच वितरित करने की मांग भी की गयी है। विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान और माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने इसे लेकर मुख्यमंत्री को एक संयुक्त पत्र लिखा है। कहा है कि, "सारदा, रोज़वैली और अलकेमिस्ट जैसी पोन्जी फर्मों में गरीब लोगों द्वारा जमा किए गए धन की लूट के बाद सात साल बीत चुके हैं, लेकिन विशेष जांच दल (एसआईटी) या न्यायमूर्ति श्यामल सेन आयोग की कोई रिपोर्ट सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं लाई गयी। ममता बनर्जी ने अप्रैल 2013 में छोटे और मध्यम निवेशकों को भुगतान करने के लिए 500 करोड़ रुपये के कोष की स्थापना की घोषणा की थी। इस आर्थिक कोष को सारदा समूह के निवेशकों के बीच वितरित किया जाना था। उन्होंने इस कार्य के लिए न्यायमूर्ति श्यामल सेन की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया। हालांकि आयोग को अक्टूबर 2014 में अपना काम पूरा करने से पहले ही खत्म कर दिया गया था। अब मन्नान और चक्रवर्ती ने मांग की कि "गरीब जमाकर्ता को पैसा वापस करने के लिए तत्काल उचित कदम उठाए जाएं, घोटाले में शामिल सभी लोगों को उचित सजा दी जाए, चिट फंड मालिकों की संपत्ति की पहचान की जाए, बिक्री के लिए उन संपत्तियों को कब्जे में लिया जाए, और नीलामी से मिले पैसे को निवेशकों के बीच वितरित करें। " संयुक्त पत्र में दोनों नेताओं ने यह भी मांग की कि जिन जमाकर्ताओं ने इन वर्षों के दौरान आत्महत्या की, उनमें से प्रत्येक के परिवार को सरकार द्वारा मुआवजे के रूप में 10-10 लाख रुपये दिए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त आधार है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारें जांच प्रक्रिया को पूरा करने में अनावश्यक समय ले रही हैं। पत्र में लिखा है, "राज्य सरकार चिट फंड मालिकों की जब्त संपत्ति से पैसा वसूलने और जमाकर्ताओं के बीच वितरित करने के लिए गठित कलकत्ता उच्च न्यायालय की नियुक्त समिति के साथ अपेक्षित तरीके से सहयोग नहीं कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी की भूमिका भी सकारात्मक नहीं है।" यह भी दावा किया गया कि सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक "विधानसभा में चिट फंड के बारे में किसी भी प्रश्न से चिढ़ जाते हैं या आक्रामक हो जाते हैं।" हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश/सुगंधी/मधुप-hindusthansamachar.in