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उत्तराखंड

चमोली जिले में जल संकट बढ़ा

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गोपेश्वर, 03 अप्रैल (हि.स.)। चमोली जिले में शीतकाल में कम बर्फबारी और इन दिनों जंगलों में लगी आग से पेयजल स्रोतों का जलस्तर तेजी से गिरा है। गर्मी की दस्तक के साथ ही जिले में अनियमित पेयजल आपूर्ति से उपभोक्ता परेशान हैं। ऐसे में मई में चारधाम यात्रा के दौरान जल संस्थान और प्रशासन के सम्मुख पेयजल की सुचारु आपूर्ति की चुनौती होगी। जिले में चारधाम यात्रा मार्ग के मुख्य पड़ावों पर पेयजल आपूर्ति के लिये जल संस्थान गोपेश्वर की ओर से 24 पेयजल योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इस वर्ष शीतकाल में कम बर्फबारी और फायर सीजन के शुरू होते ही धधकते जंगलों के चलते प्राकृतिक जल स्रोतों का जलस्तर 50 फीसदी से अधिक घट गया है। जिला मुख्यालय गोपेश्वर में पेयजल आपूर्ति के लिये जहां संस्थान की ओर से वीरगंगा, भनाक और अमृत गंगा पेयजल योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, वहीं नगर में इन दिनों पेयजल की अनियमित आपूर्ति उपभोक्ताओं के लिये परेशानी का सबब बना हुआ है। बदरीनाथ धाम में प्रहलाद धारा पूरी तरह से सूख गया है। कुर्म धारा के साथ ही धाम में मौजूद पंचधाराओं का जलस्तर भी घट गया है। स्थानीय निवासी महेंद्र रावत और मनवर सजवाण का कहना है कि कोठियाल सैंण और पूल्ड हाउस कॉलोनी में बीते कई दिनों से पेयजल की आपूर्ति मांग के सापेक्ष कम है। गोपेश्वर के मंदिर मार्ग क्षेत्र में भी पेयजल की अनियमित आपूर्ति उपभोक्ताओं के लिये आफत का सबब बनी हुई है। नंदप्रयाग और पीपलकोटी नगर में भी कमोबेश यही स्थिति है। अधिशासी अभियंता (जल संस्थान, गोपेश्वर) राजेश कुमार का कहना है कि चमोली जिले में शीतकाल में कम बर्फबारी के चलते प्राकृतिक जल स्रोतों का जलस्तर कम हो गया है। वनाग्नि की घटनाओं का भी जल स्रोतों पर बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। हालांकि जल स्रोतों का रख-रखाव कर सुचारु पेयजल आपूर्ति के प्रयास किये जा रहे हैं। वहीं यात्राकाल में पानी के टैंकरों की व्यवस्था करने की योजना बनाई गई है। हिन्दुस्थान समाचार/जगदीश/मुकुंद