उषा ब्रेकोः कहां गायब हुआ वन टाइम सेटलमेंट, निगम को 58 करोड़ मिलते

उषा ब्रेकोः कहां गायब हुआ वन टाइम सेटलमेंट, निगम को 58 करोड़ मिलते
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हरिद्वार, 17 मई (हि.स.)। उषा ब्रेको के रोप-वे विवाद में एक और नई बात सामने आई है। नगर आयुक्त नितिन भदौरिया दबाव पर बनाया गया कि उषा ब्रेको के साथ नगरपालिका के समय से 123 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी के विवाद को कंपनी के साथ मिलकर एकमुश्त समाधान निकाल कर समाप्त कर दिया जाए। इसके साथ ही ऐसा सामाधान निकाला जाना था कि कंपनी को रोप-वे का प्रति सवारी टिकट किराया बढ़ाने को लेकर नगर निगम का चक्कर न काटना पड़े। रोप-वे के टिकट का किराया जिस दर से बढ़े उसी दर से नगर निगम को देय वार्षिक राशि में भी बढ़ोतरी हो जाए। लीज अवधि भी पूरी होने पर स्वतः बढ़ जाए। इसको वन टाइम सटलमेंट नाम दिया गया था। इससे जुड़े रहे नगर निगम उस वक्त के अधिकारी का कहना है कि उषा ब्रेको की ओर से नगर आयुक्त पर काफी दबाव भी डाला जा रहा था कि यह काम होना है। नगर आयुक्त ने वन टाइम सटलमेंट में 123 करोड़ रुपये की बकाया राशि में से लगभग 58 करोड़ रुपये जमा का प्रस्ताव शासन को भेज दिया था। यह भी निर्णय लिया गया था कि 58 में से 10 करोड़ रुपये में नगर निगम का नया बहुउद्देशीय कार्यालय भवन बनाया जाएगा। भवन में सभागार, पार्किंग, कैंटीन, बैंक, डाकघर आदि सब कुछ एक छत के नीचे होने थे। आम जनता को एक छत के नीचे ही सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी थी। इसके अलावा शेष धनराशि से नगर निगम का लैंड बैंक तैयार किया जाना था। प्रक्रिया से जुड़े तत्कालीन अधिकारी ने बताया कि कंपनी वन टाइम सटलमेंट में जमा कराए जाने वाली धनराशि कुछ कम करना चाहते थे, लेकिन वह थोड़ा उपर नीचे कर विवाद निपटाने के साथ बकाया राशि जमा कराने को तैयार थी। मगर इस सेटलमेंट पर जिस संयंत्र से मुहर लगनी थी वह इसलिए नहीं लग पाई कि हमें क्या मिलेगा?। इस प्रकार नगर निगम हित का प्रस्ताव देहरादून से गायब हो गया। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत