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उत्तराखंड

अखाड़े के खिलाफ अनर्गल टिप्पणी बर्दाश्त नहीं: विद्यानन्द

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हरिद्वार, 05 फरवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज की जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी महाराज एवं किन्नर समुदाय के खिलाफ की गई बयानबाजी पर जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती महाराज ने शुक्रवार को कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। स्वामी विद्यानंद ने बयान में कहा कि प्रत्येक अखाड़े के अपने अलग नियम हैं। किसी भी संत को किसी अन्य अखाड़े के कार्य में बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज को मर्यादा में रहकर ही बयानबाजी करनी चाहिए। जूना अखाड़े के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनर्गल टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी 13 अखाड़ों में जूना अखाड़ा अपना एक अलग महत्व रखता है। देश-दुनिया से लोग कुंभ मेले के दौरान नागा साधुओं को देखने के लिए आते हैं। श्रीमहंत हरीगिरी महाराज के नेतृत्व में जूना अखाड़ा प्रतिदिन नित-नए आयाम स्थापित कर रहा है और धर्म के संरक्षण संवर्धन में अपना योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि किन्नर भी समाज का अंग हैं। वो भी जूना अखाड़े के साथ रहकर कुंभ मेले में धर्म की पताका को फहराएंगे। किसी भी संत-महापुरुष को उन पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/मुकुंद-hindusthansamachar.in