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उत्तराखंड

ग्रंथों में सत्कर्म को दी गई है प्रधानताः मीणा

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हरिद्वार, 03 अप्रैल (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग में चल रहे औषधीय पादप महाकुम्भ में डा. मौहर सिंह मीणा ने कहा कि आज जीवन की भागदौड़ में व्यक्ति को रोज नयी-नयी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सत्कर्मों की प्रधानता का हमारे वैदिक ग्रन्थों में भी विस्तार से वर्णन किया गया है। वह गीता में निष्काम कर्म योग का वर्णन विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला को सम्बोधित कर रहे थे। भेषज विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सत्येन्द्र राजपूत ने जीवन में स्वस्थ रहने के लिए कर्मों के गुणों की महत्ता को विस्तार से समझाया और निष्काम कर्मयोग की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सत्र के अन्त में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय बनारस की डा. वैशाली रघुवंशी ने पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से जीवन को स्वस्थ रखने के लिए काम आने वाले अनुसंधानों के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर डा. रविप्रताप, डा. विपिन शर्मा, डा. नरेश रांगड़ा, राजेन्द्र यादव, राहुल, हरेन्द्र मलिक, रोहित भारद्वाज, आशीष पाण्डेय, डा. अभिषेक बंसल, डा. रोशन लाल, पीयूष सिंघल, कमल सिंह, कुलभूषण शर्मा, बिजेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/मुकुंद