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उत्तराखंड

शांतिकुंज ने गायत्री जयंती, गंगा दशहरा मनाया

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हरिद्वार, 20 जून (हि.स.)। शांतिकुंज में गायत्री जयंती एवं गंगा दशहरा का पर्व समूह साधना, विश्व कल्याण की प्रार्थना एवं पौधरोपण को गति देने के संकल्प के साथ मनाया गया। इस दौरान अखण्ड जप में शारीरिक दूरी के पालन के साथ साधकों ने भाग लिया। लॉकडाउन के कारण शांतिकुंज परिवार ने पर्व पूजन का कार्यक्रम भावनात्मक रूप से सम्पन्न किया। इस दौरान गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने वीडियो संदेश दिए। इसमें शांतिकुंज और देवसंस्कृति वि.वि. परिवार ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से लाइव प्रसारण में भागीदारी की। देश-विदेश के गायत्री परिवार के कार्यकर्ता भी ऑनलाइन जुड़े। गायत्री परिवार प्रमुख डाॅ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गायत्री साधक के विचारों को पवित्र करती हैं तो पतित पावनी गंगा अपने शरण आए लोगों को शुद्ध करती हैं। गायत्री और गंगा के तीन-तीन चरण हैं, जिसके अनुपालन से प्रगति दर प्रगति होते हैं। उन्होंने पतित पावनी गंगा एवं उसकी सहायक करीब 150 नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा चल रहे गायत्री परिवार के कार्यों को गति देने के लिए प्रेरित किया। गायत्री परिवार प्रमुख ने कहा कि पं श्रीराम शर्मा ने वैचारिक क्रांति को गति देने के उद्देश्य प्रचुर मात्रा में साहित्य का सृजन किया है। इसके अध्ययन, चिंतन और मनन से हजारों-लाखों व्यक्तियों ने अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन किया है। पण्ड्या ने देशभर के युवाओं को वायु एवं वैचारिक प्रदूषण को दूर करने के लिए आह्वान किया। डाॅ. पण्ड्या ने गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ, म.प्र. आदि राज्यों में चलाये जा रहे पौधरोपण के लिए नर्सरी विकसित करने के सुझाव दिए। इस अवसर पर उन्होंने कई औषधीय, फलदार एवं छायादार पौधों का पूजन कर इसे विस्तारित करने के लिए संकल्पित कराया। उन्होंने बताया कि आज देश में 1 लाख 64 हजार पौधे रोपे जाएंगे। संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि यह महापर्व जिम्मेदारी उठाने का है। गायत्री अर्थात सद्ज्ञान एवं सत्कर्म को जन-जन तक पहुंचाने का पर्व है। आज पूरी दुनिया को ज्ञान की आवश्यकता है। सद्ज्ञान और सत्कर्म से लोगों के जीवन प्रकाशमय बन पाएगा। शैलदीदी ने कहा कि जिस तरह पतित पावनी गंगा पीड़ितों के उद्धार के लिए, उनके ताप हरने के लिए स्वर्ग से धरती पर आईं। इससे पूर्व पण्ड्या एवं शैल दीदी ने सम्पूर्ण गायत्री परिवार के प्रतिनिधि के रूप में पर्व पूजन किया। हजारों लोगों को गायत्री महामंत्र से दीक्षित किया। उल्लेखनीय है कि गायत्री परिवार के संस्थापक एवं गायत्री के सिद्ध साधक पं. श्रीराम शर्मा 1990 को गायत्री जयंती के दिन ही महाप्रयाण किया था। उनकी 31वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके बताए अभियान को गति देने के संकल्प के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आचार्यश्री की समाधि पर साधकों ने पुष्पांजलि अर्पित की। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत