जान की परवाह किए बिना कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार की सेवा में जुटा है शहीद भगत सिंह सेवा दल

जान की परवाह किए बिना कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार की सेवा में जुटा है शहीद भगत सिंह सेवा दल
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रुद्रपुर, 13 मई (हि.स.)। कोरोना काल में कुछ लोग योद्धा की तरह काम कर रहे हैं। यह लोग खुद की जिंदगी खतरे में डालकर संक्रमित शवों को मुखाग्नि देकर अपना दायित्व और मानव धर्म निभाने में जुटे हुए हैं। ऐसे ही कार्य के लिए शहीद भगत सिंह सेवा दल उत्तराखंड से जुड़े लोगों की हर जगह सराहना हो रही है। कोरोना के इस काल में जहां अपने भी कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार में शामिल होने से परहेज कर रहे हैं, वही शहीद भगत सिंह सेवादल के सदस्य न सिर्फ अंतिम संस्कार कर रहे हैं बल्कि कोरोना संक्रमित की मौत पर उन्हें कंधा भी दे रहे हैं। इतना ही नहीं श्मशान में कम पड़ रही लकड़ियों की व्यवस्था करने का काम भी यह लोग कर रहे हैं। शहीद भगत सिंह सेवा दल उत्तराखंड की यह टीम पिछले 25 दिनों में 200 से ज्यादा अंतिम संस्कार कर चुकी है। इस दौरान इनके द्वारा पूरे रीति रिवाज का पालन किया जा रहा है। शहीद भगत सिंह सेवा दल के सयोंजक अरुण चुघ के मुताबिक जिस अनुपात में श्मशान घाट में शव आ रहे हैं, यदि टीम द्वारा इन शवों के दाह संस्कार की सेवा नहीं की जाती तो यहां शवों के ढेर लग जाते। इस काल मे कई मामले ऐसे भी दिखाई दिए, जहां कोविड-19 से हुई मौतों के चलते शव को श्मशान ले जाने के लिए चार कंधे भी नसीब नहीं हुए। कहीं परिवार क्वारंटीन है तो कहीं परिजन अपनों के शव को अंतिम संस्कार देने का साहस नहीं जुटा पाए। पेशे से एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक अरुण चुघ की इस टीम में ललित बिष्ट, नरेंद्र नेगी, जसवीर सिंह, विक्रम, शेरी सांडला आदि शामिल हैं। चुघ का कहना है कि जब तक हमारी सांस है तब तक श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने की सेवा का कार्य जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर उनकी टीम हल्द्वानी व अन्य शहरों में भी सेवा करने के लिए तैयार है। हिन्दुस्थान समाचार/ विजय आहूजा

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