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उत्तराखंड

गीता आश्रम ट्रस्ट के संस्थापक ब्रह्मलीन योगीराज स्वामी शांतानंद को संतों ने दी श्रद्धांजलि

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ऋषिकेश, 28 फरवरी (हि.स.)। मनुष्य का कल्याण संतों के मार्गदर्शन में ही संभव है जो सब मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह विचार श्री गीता आश्रम ऋषिकेश में ट्रस्ट के पूर्व संस्थापक अध्यक्ष ब्रह्मलीन योगिराज स्वामी शान्तानंद महाराज की 21 वीं पुण्यतिथि समारोह के अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित संत परशुराम ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि योगीराज स्वामी शांतानंद अपने गुरु ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी विद्याश्रम वेदव्यासा नंद सरस्वती के चरणों में बैठकर जो गीता का प्रचार किए जाने का संकल्प लिया था उसे उन्होंने अपने जीवन पर्यंत देश ही नहीं विदेशों में भी पूरा किया है। जिसके चलते आज उनके हजारों शिष्य गीता के प्रचार-प्रसार में लगे हैं। उनका कहना था कि आज गीता गायत्री गंगा को बचाए जाने के लिए सभी संतों को आगे आने की आवश्यकता है। इस अवसर पर ब्रह्मलीन योगीराज स्वामी शांतानंद को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए स्वामी विष्णु गिरि ने कहा कि वह एक मृदुल स्वभाव के थे जिसके कारण उनके शिष्य देश ही नहीं विदेशों में भी काफी संख्या में है। श्रद्धांजलि सभा का संचालन आश्रम के प्रबंधक भानु मित्र शर्मा ने किया। जिसमें अनेकों संतों ने योगीराज स्वामी शांतानंद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर स्वामी संध्या गिरि, समाजसेवी राजकुमार राजू सहारनपुर, बंसी नौटियाल, शास्त्री दिव्यानंद, चंद्र मित्र शुक्ल, त्रिभुवन उपाध्याय, प्रेम मित्र, गीता चैतन्य, आदेश तोमर आदि ने भी महाराज को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि समारोह के पूर्व आश्रम में गीता रामायण पाठ हवन कार्यक्रम संपन्न हुआ। हिन्दुस्थान समाचार /विक्रम