जैव विकास के क्रम को समझने के लिए पौधों का वंशगत इतिहास जानना जरूरीः प्रो. पांडेय
जैव विकास के क्रम को समझने के लिए पौधों का वंशगत इतिहास जानना जरूरीः प्रो. पांडेय
उत्तराखंड

जैव विकास के क्रम को समझने के लिए पौधों का वंशगत इतिहास जानना जरूरीः प्रो. पांडेय

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गोपेश्वर, 30 जुलाई (हि.स.)। चमोली जिले के पोखरी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से बुधवार को विभागाध्यक्ष डा. अभय कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई मे रीसेंट ट्रेंड्स इन सिस्टेमेटिक पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी, भोपाल के कुलपति प्रो. अरुण कुमार पांडेय ने कहा कि जैव विकास के क्रम को समझने के लिए पौधों का वंशगत इतिहास जानना जरूरी है। मुख्य वक्ता फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ़ नेचुरल हिस्ट्री एवं जीव विज्ञान विभाग प्रो. डगलस एडवर्ड सोल्टिस थे। उन्होंने ने बिल्डिंग ट्री ऑफ़ लाइफ (जीवन इतिहास के वंशगत वृक्ष निर्माण) विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम चार्ल्स डार्विन ने इस प्रकार के कार्य में रुचि दिखाई थी। तब से लेकर अब तक बहुत से जीवों के वंशगत इतिहास का अलग-अलग अध्ययन किया जा चुका है परन्तु एक साथ एकीकृत डाटा, जो सभी प्लांट्स के इतिहास को एक साथ प्रदर्शित करे, अब तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने डीएनए सिक्वेंसिंग एंड डाटा एनालिसिस के माध्यम से लाइफ ट्री डेवलपमेंट पर जोर दिया और कहा कि आज के समय में सभी देशों को प्लांट टैक्सोनॉमिस्ट के एक प्लेटफार्म पर आकर लाइफ ट्री विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। लाइफ ट्री कि उपयोगिता के बारे में उन्होंने बताया कि इस लाइफ ट्री के डीएनए डाटा बेस से भविष्य में यदि कोई प्लांट विलुप्त होते हैं तो उसकी भी पूरी जानकारी हम प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार से यह लाइफ ट्री प्लांट संरक्षण में भी सहायता करेगा तथा औषधीय पौधे की ठीक-ठीक पहचान करने में भी सहायक होगा। इसके साथ ही प्रमाणित डाटा उपलब्ध होने से गुणवत्तापूर्ण फसलों को विकसित करने, क्लाइमेट चेंज को समझने तथा जैव विविधता संरक्षण में सहायता मिलेगी। मुख्य अतिथि मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी, भोपाल के कुलपति प्रो. अरुण कुमार पांडेय ने अपने उद्घाटन व्याख्यान में पादप वर्गीकरण के विभिन्न सिद्धांतों का जिक्र करते हुए उनके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्लांट टेक्सोनोमी, प्लांट साइंस के आधारभूत विज्ञान में से एक है। इसके बिना प्लांट साइंस के आधुनिक विज्ञान की वैधता नहीं है, क्योंकि आणविक स्तर पर अथवा ड्रग डेवलपमेंट के लिए भी हम तभी काम कर सकते हैं. जब हमें किसी पौधे की ठीक-ठीक पहचान हो। इसके साथ ही प्रोफेसर पांडेय ने पौधों के वंशगत इतिहास (फाइलोजेनी) को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे हम जैव विकास के क्रम को ठीक से समझ सकें। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के वनस्पति विज्ञान के प्रो. एनके दुबे, डा. प्रशांत सिह, राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. तारिक़ हुसैन, महाविद्यालय के डॉ. महेंद्र सिंह चौहान, डॉ कंचन सहगल, डॉ.अनिल कुमार, डॉ, रेनू, डॉ, अंजलि रावत, डॉ. आरती रावत,डॉ. नन्द किशोर चमोला आदि शामिल थे। हिन्दुस्थान समाचार/जगदीश-hindusthansamachar.in