प्रेमचंद हुए अधिक प्रासंगिक: प्रो. श्रीवास्तव
प्रेमचंद हुए अधिक प्रासंगिक: प्रो. श्रीवास्तव
उत्तराखंड

प्रेमचंद हुए अधिक प्रासंगिक: प्रो. श्रीवास्तव

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नैनीताल, 31 जुलाई (हि.स.)। कुमाऊं विश्वविद्यालय के रामगढ़ स्थित महादेवी सृजन पीठ में शुक्रवार को युगदृष्ठा उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की 140वीं जयंती पर ‘भारतीय समाज, राष्ट्रवाद, और प्रेमचंद’ विषयक ऑनलाइन संवाद आयोजित हुआ। इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में इग्नू यानी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि की मानविकी विद्यापीठ में हिंदी के प्रोफेसर जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान में दुनिया की तकलीफों ने प्रेमचंद को और अधिक प्रासंगिक बना दिया है। वह ज्यादा अपने नजर आने लगे हैं। जिन लोगों की नसों में बाजार घुस चुका है, वे गरीबी, किसानों की दशा और गांवों की हालत न समझ पाने के बावजूद प्रेमचंद को पढ़ रहे हैं। आज साहित्य रसिकों को ही नहीं, बाजार की ताकतों के लिए भी प्रेमचंद को समझना जरूरी हो गया है। उन्होंने प्रेमचंद के महान इतिहासकार होने के लिए उनके यथार्थ के प्रति अधिक संवेदनशील होने का कारण बताया। इस मौके पर पीठ के निदेशक प्रो. शिरीष कुमार मौर्य ने कहा कि पीठ के द्वारा कोरोना काल में नियमित रूप से ऑनलाइन साहित्यिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। ऑनलाइन संवाद में पीठ के शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत, साहित्यकार स्वाति मेलकानी, उदय किरौला, खेमकरण सोमन, मोती प्रसाद साहू, मदन बिष्ट, गोविंद नागिला, कल्पना शाह, सुमिता गढ़कोटी, अल्का तिवारी, हेमा जोशी, डा. गिरीश पांडे ‘प्रतीक’, सुधा जोशी, प्रकाश उप्रेती व भरत मेहता सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी शामिल रहे। हिन्दुस्थान समाचार/नवीन जोशी-hindusthansamachar.in