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उत्तराखंड

पारंपरिक दवाओं के मुकाबले नैनो फार्मास्युटिकल्स अधिक कारगरः जोशी

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हरिद्वार, 27 फरवरी (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग में चल रहे औषधीय पादप महाकुम्भ के क्रम में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को ऑनलाइन दो दिवसीय नेशनल सेमिनार शुरू हुआ।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रूप किशोर शास्त्री अध्यक्ष तथा उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. जोशी ने कहा कि पारंपरिक दवाओं के मुकाबले नैनो फार्मास्युटिकल्स का उपयोग अधिक कारगर है। प्रो. अनुराग वर्मा ने प्रतिभागियों को विभिन्न संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए नैनो फार्मास्युटिकल्स के उपयोग एवं महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पारंपरिक दवाओं के मुकाबले नैनो फार्मास्युटिकल्स अधिक उपयोगी एवं कारगर होते हैं जिससे लीस्मानिया, काला अजार. एवं दिमागी बुखार को समय रहते हुए त्वरित गति से नियंत्रित किया जा सकता है। गुरु घासी दास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के प्रो. सुरेन्द्र एच. बोड़के ने कहा कि कोरोना काल के पश्चात दवाओं के अनुसंधान की दशा एवं दिशा काफी बदल गई है। अब जानवरों पर प्रयोग की महत्ता भी बढ़ गई है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय हरिद्वार एवं उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपतियों ने सभी प्रतिभागियों को विज्ञान दिवस एवं औषधीय पादप महाकुम्भ के महत्व के बारे में बताया। के संकायाध्यक्ष प्रो. आरसी दुबे एवं विभागाद्यक्ष प्रो. सतेन्द्र राजपूत ने सभी को पादपों की उपयोगिता के बारे में बताया। कार्यक्रम के संयोजक सचिव डॉ. विपिन कुमार शर्मा ने कार्यक्रम की विस्तृत रूप रेखा को साझा किया।विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. दिनेश चन्द्र भट्ट ने सभी का आह्वान किया कि औषधीय पादप महाकुम्भ से जुड़कर आरोग्य लाभ उठायें। डॉ. एलपी पुरोहित, डॉ. दीनदयाल, डॉ. श्वेतांक आर्य डॉ. आशीष पाण्डेय, डॉ. रवि प्रताप आदि ने आयोजन में सहयोग किया। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/मुकुंद