प्रधानमंत्री ने अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर इस वर्ग को नई पहचान दीः त्रिवेन्द्र
प्रधानमंत्री ने अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर इस वर्ग को नई पहचान दीः त्रिवेन्द्र
उत्तराखंड

प्रधानमंत्री ने अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर इस वर्ग को नई पहचान दीः त्रिवेन्द्र

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देहरादून, 17 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में भाजपा ओबीसी मोर्चे की वर्चुवल रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की संख्या काफी है। प्रधानमंत्री ने अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवेधानिक दर्जा देकर इस वर्ग को नई पहचान दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सभी वर्गो के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिये ई-आफिस को बढ़ावा दिया जा रहा है इससे प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने तथा शासकीय व्यवस्था में पारदर्शिता आयेगी। उन्होंने कहा कि देहरादून के साथ ही नगर निगमों व स्थानीय नगर निकायों में भी इसकी शुरुआत की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ ही पूरा समाज हमारे साथ है। हमने अपने तीन वर्ष की अवधि में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किये हैं। स्वरोजगार योजना के तहत 25-25 किलोवाट की योजना आरम्भ की गई है, जिससे लाभार्थियों की अच्छी आय होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की स्थितियों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में प्रवासी भाइयों को उनके घर पहुंचाया गया है। उनके स्वास्थ्य, भोजन आदि की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही इनमें से जो लोग अब उत्तराखण्ड में रहकर ही काम करना चाहते हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में व्यवस्था की गई है। मनरेगा में 36 हजार नए रजिस्ट्रेशन करते हुए काम उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा गैरसैंण को ग्रीष्म कालीन राजधानी तथा देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें पुजारियों एवं पण्डों को जो हल हकूक मिलता है, वो मिलता रहेगा, इसीलिए सरकार द्वारा तय किया गया है कि बोर्ड के अध्यक्ष हिन्दू ही होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य की दृष्टि से अटल आयुष्मान योजना लागू की गई है, जिससे प्रदेश के 1 लाख 82 हजार पात्र लोगों को योजना का लाभ मिला है तथा योजना में 165 करोड़ बीमार लोगों के इलाज का सरकार ने खर्च उठाया है। उन्होंने कहा कि इसमें लाभ उठाने वाले वो लोग हैं, जो आर्थिक रूप से गरीब लोग है। उन्होंने कहा कि कृषकों के लिए भी व्यवस्था की गई है जो किसान भाई औद्यानिकी का कार्य करते हैं उनके साथ अन्याय होता था कि वे जो पौध खरीद कर लाते थे, उसकी कोई गारंटी नही होती थी। इसका नुकसान सीधा किसानों को उठाना पड़ता था। इस वजह से सरकार द्वारा नर्सरी एक्ट एवं जैविक कृषि एक्ट बनाया गया है। सरकार द्वारा होम स्टे योजना लागू की गई है ,जिससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में योजना का लाभ प्राप्त होगा तथा योजना से पर्यटकों में भी अच्छा संदेश गया है। हिन्दुस्थान समाचार/दधिबल-hindusthansamachar.in