कोरोना: महंत रविंद्र पुरी ने अनुकरणीय कार्य कियाः नरेंद्र गिरि
कोरोना: महंत रविंद्र पुरी ने अनुकरणीय कार्य कियाः नरेंद्र गिरि
उत्तराखंड

कोरोना: महंत रविंद्र पुरी ने अनुकरणीय कार्य कियाः नरेंद्र गिरि

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हरिद्वार, 17 जुलाई (हि.स.)। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि कोरोना संकट के समय सभी धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक मदद के लिए आगे आना चाहिए और जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री निरंजनी पंचायती अखाड़ा के सचिव और श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज ने प्रशंसनीय भूमिका निभाई है। वे जरूरतमंदों के लिए देवदूत बनकर सामने आए और उन्होंने अखाड़े की तरफ से और मंदिर ट्रस्ट की तरफ से केंद्र और राज्य सरकार को भरपूर आर्थिक सहायता प्रदान की। महंत रवींद्र पुरी का कोरोना संकट के समय यह कार्य अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि अन्य अखाड़ों ने भी केंद्र और राज्य सरकार को आर्थिक सहयोग दिया। राष्ट्र के संकट के समय हमेशा अखाड़े अग्रणी भूमिका निभाते हैं और सहायता के लिए आगे बढ़कर कार्य करते हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री औली द्वारा नेपाल में अयोध्या होने और भगवान राम के नेपाली होने पर दिए गए बयान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महन्त नरेंद्र गिरि ने कहा कि नेपाल का प्रधानमंत्री पागल है, जो चीन के दबाव में मानसिक अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है। इसलिए वह भगवान राम और उनके जन्म स्थल अयोध्या के बारे में गलत बयानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भगवान राम के जन्मस्थल अयोध्या के बारे में निर्णय दे चुके हैं। सदियों से अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है और भगवान राम भारतवंशी हैं। इस बारे में कोई संदेह नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि वे नेपाल के प्रधानमंत्री पर दबाव डालकर इस कृत्य के लिए माफी मांगने के लिए कहें। उन्होंने कहा, चीन एक अविश्वसनीय देश है और भारतीय सेना चीन का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लद्दाख क्षेत्र के दौरे से भारतीय सैनिकों का मनोबल बढ़ा है। लेह और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है। चीन से भारत समेत कई देश परेशान हैं। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि पहले जमाने में नागा संन्यासी धर्म की रक्षा के लिए फौज के रूप में युद्ध करते थे परंतु अब वैसी स्थिति नहीं रही है, परंतु अभी भी यदि जरूरत पड़ी तो राष्ट्र के संकट के समय नागा संन्यासी और साधु संन्यासी देश की सीमा में जाने के लिए तैयार हैं और राष्ट्र रक्षा में अपना योगदान देंगे। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/मुकुंद-hindusthansamachar.in