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उत्तराखंड

अगर थोड़ी सी चूक होती तो गुलदार का निवाला बन जाताः जॉय हुकिल

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पौड़ी, 11 जून (हि.स.)। गुरुवार रात। मशहूर शिकारी जॉय हुकिल अपने सहयोगी अजहर के साथ चौबट़टाखाल तहसील के मजगांव के खेतों में नरभक्षी मादा गुलदार (तेंदुआ) के इंतजार में बैठे हैं। यहां एक मादा नरभक्षी गुलदार ने खेतों में काम कर रही महिला को अपना निवाला बना दिया था। महिला के खून से सने कपड़े अभी भी पड़े हुए हैं। करीब साढ़े आठ बजे झाड़ियों में कुछ सरसराहट होती है। जॉय हुकिल अपने सहयोगी अजहर को झाड़ियों में टार्च लगाने को कहते हैं। और झाड़ियों की ओर बढ़ जाते हैं। टार्च के उजाले में दो आंखें चमकती हुई दिखाई देती हैं। जॉय हुकिल व अजहर कुछ समझ पाते कि अचानक झाड़ियों से गुलदार दहाड़ते हुए हमला करने के लिए आगे बढ़ता है। जाॅय हुकिल तुरंत गोली दाग देते हैं। जो गुलदार के खुले मुंह को चीरते हुए आगे निकल जाती है और नरभक्षी मादा गुलदार वहीं ढेर हो जाती है। गुलदार व जाॅय हुकिल के बीच मात्र पांच मीटर का फासला था। गोली चलने में यदि थोड़ी देर हो जाती तो घटना कुछ और हो सकती थी। यह पूरा वाकया मशहूर शिकारी जॉय हुकिल ने घटना के बाद 'हिन्दुस्थान समाचार' से फोन पर साझा किया।जॉय हुकिल अब तक 41 नरभक्षी गुलदारों का शिकार कर चुके हैं। जॉय हुकिल ने पहली बार वर्ष 2007 में कीर्तिनगर के सिल्काखाल क्षेञ में नरभक्षी गुलदार का शिकार किया था। जाॅय हुकिल बताते हैं कि इस समय सिल्काखाल क्षेत्र में दो नरभक्षी गुलदारों का आतंक था। इसके दो साल बाद वर्ष 2009 में नरभक्षी गुलदार का शिकार करने का मौका मिला। तब से लेकर अब तक हुकिल 41 नरभक्षी गुलदारों को ढेर कर चुके हैं। हुकिल कहते हैं कि बेजुबान जानवर को मारने के बाद मन बहुत व्यथित होता है। लेकिन नरभक्षी गुलदारों से मानव जीवन को बचाने व समाज सेवा के लिए वह ये सब करते हैं। जॉय हुकिल कहते हैं कि निहत्थे बेजुबान जानवर को मारना गर्व की बात नहीं है। मानव जीवन को बचाने के लिए इसे मजबूरी में मारना पड़ता है। जानवर को मारना अंतिम विकल्प है। हुकिल कहते हैं कि नरभक्षी गुलदार को मारना इसलिए भी जरूरी हो जाता है कि ताकि इसका अनुकरण कर अन्य गुलदार भी नरभक्षी न बनें। हुकिल गुरुवार रात को मंजगांव में किए गए नरभक्षी मादा गुलदार के एनकाउंटर को अपने जीवन के बेहद खतरनाक शिकारों में से एक बताते हैं। हिन्दुस्थान समाचार /राज