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उत्तराखंड

विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष के लिए अभी और इंतजार

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-दो साल से खाली है नियामक आयोग अध्यक्ष का पद -बीपी पांडेय के इंकार के बाद नए सिरे से शुरू हुई प्रक्रिया देहरादून, 25 जनवरी (हि.स.)। बिजली के पूरे सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए जवाबदेह विद्युत नियामक आयोग की सबसे अहम कुर्सी (अध्यक्ष पद) दो साल से खाली है। इस पद के लिए चयनित पूर्व आईएएस बीपी पांडेय के इनकार के बाद नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई है। नियुक्ति कब तक हो पाती है, यह कहना मुश्किल है। दरअसल, इस अहम पद के लिए लगातार दांव-पेंच और जोर-आजमाइश चलती रही है। यही वजह रही है कि पिछले साल पूर्व आईएएस बीपी पांडेय को चयनित करने में काफी ज्यादा समय लग गया। 74 पूर्व नौकरशाह इस पद के लिए लाइन में थे और जोर आजमाइश चरम पर रही थी। सरकार इस बात से थोड़ा सुकून में आई थी कि आयोग को अब अध्यक्ष मिल गया है, लेकिन उसे झटका लगते हुए भी देर नहीं लगी। नवनियुक्त अध्यक्ष ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। उन्होंने सरकार को सूचित भी कर दिया कि अब वह इस पद पर काम करने के इच्छुक नहीं हैं। इसके बाद एक बार फिर सरकार ने नए अध्यक्ष की तलाश शुरू कर दी है। यह तलाश जल्द पूरी होगी, इसकी संभावना कम है। इसकी बड़ी वजह चयन प्रक्रिया में लगने वाला स्वाभाविक समय है। इसके अलावा कहीं न कहीं विधानसभा चुनाव की तरफ जाती हुई सरकार भी इस पर निर्णय लेने से बचना चाहेगी, क्योंकि पूर्व नौकरशाहों के बीच इस पद के लिए जिस तरह से जोर आजमाइश होती आई है, उसमें दबाव से बचने का एक तरीका तटस्थता का भी बचता है। वर्तमान में दो सदस्यीय आयोग में न्यायिक सदस्य डीपी गैरोला पर ही अध्यक्ष की जिम्मेदारी है। सरकार को नियामक आयोग के काम में बहुत दिक्कत भी नहीं दिखाई दे रही है। गैरोला के कार्यवाहक अध्यक्ष रहते हुए ही पांच नए उपभोक्ता शिकायत निवारण मंचों का न सिर्फ गठन हुआ, बल्कि उन्होंने तेजी से काम करना भी शुरू कर दिया है। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का कहना है कि आयोग के नए अध्यक्ष की जल्द ही नियुक्ति करने का प्रयास किया जा रहा है। चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हिन्दुस्थान समाचार/विशेष संवाददाता/मुकुंद-hindusthansamachar.in