जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी सेवा समाप्ति का आदेश हाईकोर्ट ने किया निरस्त
जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी सेवा समाप्ति का आदेश हाईकोर्ट ने किया निरस्त
उत्तराखंड

जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी सेवा समाप्ति का आदेश हाईकोर्ट ने किया निरस्त

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नैनीताल, 23 जुलाई (हि.स.)। हाईकोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से 14 जुलाई, 2020 को जारी याचिकाकर्ता की सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त करते हुए उसे सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार ऊधमसिंह नगर निवासी श्रीमती कामुली मंडल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जिला शिक्षा अधिकारी के 14 जुलाई , 2020 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसने याचिकाकर्ता की सेवा को समाप्त करने के आदेश पारित किया था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि उसकी नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय फूलसूंगा, रूद्रपुर ऊधमसिंह नगर में 1 सितंबर, 1996 को सहायक अध्यापक के रूप में हुई थी। उसके बाद याचिकाकर्ता की पदोन्नति 11 मार्च, 2008 को प्रधानाध्यापक के पद पर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसकी नियुक्ति जिला शिक्षा अधिकारी ने इस आधार पर निरस्त कर दी कि याचिकाकर्ता का जाति प्रमाण पत्र जो कि नमोसूद्र जाति का था, जो अनुसूचति जाति के आधार पर प्राप्त की गई थी, वह फर्जी है, क्योंकि वह केवल छात्रवृत्ति के लिए ही अनुमान्य है। याचिकाकर्ता की ओर से इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता की सेवाएं बिना सरकारी कर्मचारी सेवा आचरण नियमावली के प्रावधानों के अनुपालन करते हुए समाप्त की गई है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से 14 जुलाई, 2020 को जारी याचिकाकर्ता की सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त करते हुए उसे सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए। हिन्दुस्थान समाचार/लता नेगी-hindusthansamachar.in