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उत्तराखंड

देवप्रयाग तीर्थ युगों से तपोभूमि: मोरारी बापू

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नई टिहरी, 27 जून (हि.स.)। भगवान राम की तपस्थली देवप्रयाग में पहली बार रामकथा करते हुए संत मोरारी बापू ने कहा पावन गंगा का तीर्थ देवप्रयाग युगों से तपोभूमि है। नौ दिवसीय रामकथा को उन्होंने मानस देवप्रयाग नाम दिया। पंतजलि सेवाश्रम देवप्रयाग में आयोजित 861 वीं रामकथा की शुरुआत करते संत मोरारी बापू ने कहा उत्तराखंड के पंचप्रयागों में देवप्रयाग से ही पावन गंगा की धारा प्रवाहित होती है। देव शर्मा ब्राह्मण के कठोर तप से भगवान विष्णु ने प्रगट होकर राम अवतार में लीला समापन के बाद इस स्थल को उनके नाम पर देवप्रयाग रखने का वर दिया था। तप में बहुत बल होता है । देव शर्मा के तप से देवप्रयाग तीर्थ उजागर हुआ। कलियुग में बुरा न सुनना, बुरा न कहना, बुरा न देखना ही तप है। उन्होंने राम चरित मानस की चौपाई, को कही सकई प्रयाग प्रभाऊ के आधार पर रामकथा को मानस देवप्रयाग नाम दिया। बाल कांड के सात मंत्रों के मंगल चरण से रामकथा की शुरुआत करते उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा से वह पावन तीर्थ देवप्रयाग में यह कथा कर पा रहे हैं। संत मुरारी बापू का पंतजलि सेवा श्रमवासी ब्रह्म कुमारों और साध्वियों ने वैदिक मंत्रों के साथ स्वागत किया। रामकथा आयोजन में उन्होंने स्वामी रामदेव, सतवा बाबा प्रयाग, मोहन बाबा वृदावन और वैष्णव भक्त नियति बहन का आभार जताया। रामकथा प्रतिदिन सुबह दस से दोपहर एक बजे तक आयोजित हो रही है। हिन्दुस्थान समाचार/प्रदीप डबराल