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उत्तराखंड

सैन्य बाहुल्य गांव सवाड में सैनिक धाम बनाने की मांग

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गोपेश्वर, 02 अप्रैल (हि.स.)। राज्य के सैनिक बाहुल्य गांव में शुमार चमोली जिले के देवाल विकास खंड के सवाड़ गांव में सैनिक धाम बनाए जाने की मांग को लेकर क्षेत्रीय पंचायत प्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों, क्षेत्रीय जनता ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य आशा धपोला, क्षेपंस दीक्षा देवी, ग्राम प्रधान कंचना देवी आदि के हस्ताक्षर हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि इस गांव के सैकड़ों रणबांकुरों ने आजादी से पहले और आजादी के बाद अपना सर्वोच्च बलिदान किया है। 2008 से सवाड़ ग्राम पंचायत व गांव के पूर्व सैनिक युवाओं में देश प्रेम का जज्बा कायम रखने के लिए प्रति वर्ष 7 दिसम्बर को अमर शहीद सैनिक मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले का चार बार मुख्यमंत्री, आठ बार कैबिनेट मंत्री एवं सांसद उद्घाटन कर चुके हैं। बावजूद इसके सरकार से मेले को अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता। ज्ञापन में कहा गया है कि देहरादून में पहले से ही एतिहासिक शहीद स्थल एवं आईएमए जैसे प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान हैं। देहरादून में सैनिक धाम बनाने का निर्णय लिया जाना इस पहाड़ी राज्य के साथ न्याय नही हैं। सैन्यधाम सैन्य बाहुल्य सवाड़ गांव में बनना चाहिए। अगर यहां सैन्यधाम बनता है तो क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा कर पलायन जैसी समस्या से निजात पाया जा सकेगा। जो लौट के घर न आएः पूर्व सैनिक व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि बताते हैं कि 1914 से 1919 में लड़े गए प्रथम विश्व युद्ध में इस गांव के 22 जवान, 1939 से 1945 तक लड़े गए द्वितीय विश्व युद्ध में 30 एवं आजादी की लड़ाई में 17 वीर योद्धाओं ने भाग लेकर गांव का ही नहीं पूरे उत्तराखंड का नाम गर्व से रोशन कर इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज किया है। आजादी के बाद 1962, 1965 एवं 1971 में पाकिस्तान एवं चीन के साथ हुए युद्ध में भी इस गांव के कई सैनिकों ने भाग लिया। ब्लू स्टार, कारगिल युद्ध सहित तमाम अन्य आपरेशनों में भी इस गांव के वीर सैनिकों ने हिस्सा लिया। इस गांव के छह वीर सैनिकों ने देश की हिफाजत के लिए अपने प्राणों की आहुति भी दी है। हिन्दुस्थान समाचार/जगदीश/मुकुंद