रंगकर्मी सुरेंद्र भंडारी की कोरोना से मौत

 रंगकर्मी सुरेंद्र भंडारी की कोरोना से मौत
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-रंगमंच के सूत्रधार थे सुरेंद्र भंडारी:धस्माना देहरादून, 07 मई (हि.स.)। उत्तराखंड के प्रसिद्द रंगकर्मी व उत्तराखंडी फिल्मों के कलाकार सुरेंद्र भंडारी की कोरोना से मृत्यु हो गई। उनके परिवार में धर्मपत्नी और एक बिटिया हैं। उनके निधन पर लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भंडारी की मृत्यु को पूरे राज्य के रंगमंच व क्षेत्रीय भाषायी फिल्मों के लिए एक बड़ा आघात बताया। उन्होंने कहा कि भंडारी का देहरादून व उत्तराखंड के रंगमंच में अतुलनीय योगदान रहा है। नाटकों का मंचन, अभिनय, निर्देशन इन सब विधाओं में दिवंगत भंडारी निपुण थे और वास्तव में देहरादून रंगमंच के सूत्रधार थे। उन्होंने कहा कि दिवंगत भंडारी से उनके चार दशकों से पारिवारिक रिश्ते थे और वे परिवार के सदस्य की तरह ही थे। साथ ही कहा कि "सुरेंद्र भाई हमारे बड़े भाई जैसे थे, मेरे दोनों बड़े भाइयों डॉक्टर श्रीकांत धस्माना के सहपाठी व मुकेश भाई के अभिन्न मित्र व रंगमंच और फिल्मों में साथी। उनको खो कर अत्यंत पीड़ा का अनुभव हो रहा है।" सुरेंद्र भंडारी के फिल्मी सफर व रंगमंच के बारे में धस्माना ने कहा कि गढ़वाली फ़िल्म "कभी सुख कभी दुख" में अभिनय व "मेरी प्यारी बोई" में निर्देशन में हमेशा याद किया जाएगा। बेगम का तकिया,अंधा युग,डेथ इन इन्स्टालमेन्ट ,पहला विद्रोही, दुलारी बाई,कागज़ की कतरनें,जात न पूछो साधू की,काफी हाउस में इंतज़ार, रागदरबारी,खौफ की परछाइयां जैसे नाटकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बड़ी बुआ जी में अनाथ की भूमिका में बहुत प्रशंसा बटोरी थी। हिन्दुस्थान समाचार/राजेश/चंद्र