मुनि चिदानंद प्रकरणः रिजर्व फारेस्ट की भूमि पर अतिक्रमण ध्वस्त कर 3 माह में रिपोर्ट पेश करेंः हाईकोर्ट
मुनि चिदानंद प्रकरणः रिजर्व फारेस्ट की भूमि पर अतिक्रमण ध्वस्त कर 3 माह में रिपोर्ट पेश करेंः हाईकोर्ट
उत्तराखंड

मुनि चिदानंद प्रकरणः रिजर्व फारेस्ट की भूमि पर अतिक्रमण ध्वस्त कर 3 माह में रिपोर्ट पेश करेंः हाईकोर्ट

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नैनीताल, 31 जुलाई (हि.स.)। मुनि चिदानंद की ओर से वीरपुरखुर्द वीरभद्र (निकट ऋषिकेश) में रिजर्व फारेस्ट की 35 बीघा भूमि पर अतिक्रमण करने व उस पर निर्माण कार्य किये जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वे तीन माह में अतिक्रमण को ध्वस्त कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविकुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी अर्चना शुक्ला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ऋषिकेश के निकट वीरपुरखुर्द वीरभद्र में मुनि चिदानंद ने रिजर्व फारेस्ट की 35 बीघा भूमि पर कब्जा करके वहां पर 52 कमरे, एक बड़ा हाल और गौशाला का निर्माण कर लिया है। याचिका में कहा कि मुनि चिदानंद के रसूखदारों से संबंध होने के कारण वन विभाग व राजस्व विभाग द्वारा इसकी अनदेखी की जा रही हैं। कई बार प्रशासन व वन विभाग को अवगत कराया गया लेकिन वहां पर किसी तरफ की गतिविधियों पर रोक नही लगी। याचिकाकर्ता ने उस भूमि से अतिक्रमण हटाकर यह भूमि सरकार को सौंपी जाने की मांग की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि वे तीन माह में अतिक्रमण को ध्वस्त कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। हिन्दुस्थान समाचार/दधिबल-hindusthansamachar.in