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उत्तराखंड

चारधाम यात्राः नाजुक वक्त में ठोस फैसला

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-कुंभ की तरह प्रतीकात्मक यात्रा का विकल्प भी नहीं चढ़ पाया परवान -यात्रा टलने से उम्मीदों पर ग्रहण, मगर कोरोनाकाल में उचित निर्णय देहरादून, 29 अप्रैल (हि.स.)। कोरोना की दूसरी लहर ने उत्तराखंड में जिस तरह का तांडव मचाया है, उसमें चारधाम यात्रा स्थगित करने का फैसला अप्रत्याशित नहीं है। हालांकि हरिद्वार कुंभ के साथ जुडे़ प्रतीकात्मक प्रयोग का विकल्प चारधाम यात्रा के संबंध में भी मौजूद था, लेकिन सरकार ने ठोस फैसला करके श्रद्धालुओं की मन की इच्छा और यात्रा कारोबारियों की आजीविका जैसे विषय से ज्यादा लोगों की जान की सुरक्षा को अहमीयत दी है। हालांकि चारधाम के कपाट अपने तय समय में ही खुलेंगे, लेकिन श्रद्धालुओं को वहां आने-जाने की इजाजत नहीं दी गई है। पिछले वर्ष की तरह यदि आने वाले दो-चार महीनों में स्थिति सुधरेगी, तो फिर कुछ प्रतिबंधों के साथ यात्रा के संचालन की स्थिति बन सकती है। कोरोना की दूसरी लहर ने इस बार चारधाम यात्रा को लेकर की जा रही उम्मीदों पर ग्रहण लगा दिया है। एक बार फिर वर्ष 2020 जैसी स्थितियों से चारधाम यात्रा गुजर रही है, जबकि कोरोना के बढ़ते मामलों ने सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया है। कोरोना का प्रहार इस बार पहले के मुकाबले और ज्यादा घातक है। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण और इससे होने वाली मौतों का रोजाना नया रिकार्ड बन रहा है। इस बार 14 मई से यात्रा का विधिवत शुभारंभ प्रस्तावित था, लेकिन अब सिर्फ चारधामों के कपाट खुलेंगे, लेकिन यात्रा शुरू नहीं हो पाएगी। यात्रा के साथ उत्तराखंड के छोटे-बडे़ करीब ढाई लाख व्यवसायी जुडे़ हैं। पिछले साल यात्रा के बुरी तरह पिट जाने के बाद सभी को इस बार यात्रा से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन ये उम्मीदें कोरोना के प्रकोप से धराशायी हो गई हैं। वर्ष 2020 में सरकार ने जून से प्रतीकात्मक रूप से यात्रा संचालित की थी, जिसमें पहले स्थानीय और फिर बाहर के प्रदेशों के श्रद्धालुओं के लिए प्रतिबंधों के साथ यात्रा के दरवाजे खोले गए थे। सरकार ने इस बात से सुकून महसूस किया था कि कोरोनाकाल के बावजूद यात्रा को संचालित किया गया था, हालांकि जितने दिन पिछले साल यात्रा चली, वह यात्रा से जुडे़ कारोबारियों के संबंध में ऊंट के मुंह में जीरा जैसी थी। वर्ष 2020 में 30 हजार करीब श्रद्धालु चारधाम पहुंच पाए थे। यह संख्या किस कदर कम थी, इसे वर्ष 2019 में आए श्रद्धालुओं की संख्या के साथ तुलना करके समझा जा सकता है। वर्ष 2019 में 34 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम का रुख किया था। वैसे, सरकार के सामने चारधाम यात्रा को प्रतीकात्मक रूप से चलाने का विकल्प भी था। मगर बढ़ते कोरोना खतरे को देखते हुए सरकार ने ठोस औेर सख्त फैसला करना ही मुनासिब समझा। वैसे भी कोरोना महामारी के बीच हरिद्वार कुंभ को लेकर सरकार लगातार आलोचना का शिकार रही थी। इन स्थितियों के बीच सरकार के रणनीतिकार मान कर चल रहे हैं कि दो-तीन महीने में कोरोना संक्रमण यदि काबू में आया तो यात्रा को संचालित किया जा सकता है। वैसे भी चारधाम यात्रा उत्तराखंड में नवंबर तक चलती है। शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में चारधाम यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। आने वाले समय में कोरोेना वायरस से जुड़ी स्थितियों की समीक्षा करते हुए निर्णय लिए जाएंगे। हिन्दुस्थान समाचार/विशेष संवाददाता