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उत्तराखंड

चार धाम यात्राः कपाट तो खुल गए, कब खुलेगी तकदीर

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- कोविड-19 की वजह से लगातार दूसरे साल चार धाम यात्रा चौपट - यात्रा पर पाबंदी से 11 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आंकलन देहरादून, 03 जून (हि.स.)। उत्तराखंड की चार धाम यात्रा को इस बार भी कोरोना का असर पड़ा। मई में चारों धामों के कपाट खुल जाने के बावजूद श्रद्धालुओं, पर्यटकों के लिए यहां के दरवाजे नहीं खुल पाए हैं। इस वजह से हर साल अपनी आजीविका का पहिया घूमने की उम्मीद करने वाले यात्रा कारोबारी मायूस हैं। रोजी-रोटी के संकट ने उनकी कमर तोड़ दी है। एक अनुमान के मुताबिक, इस यात्रा सीजन के ठप रहने की वजह से उत्तराखंड को 11 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो गया है जबकि पर्यटन, तीर्थाटन की अर्थव्यवस्था 20 हजार करोड़ की है। इस हिसाब से देखा जाए तो चार धाम यात्रा ठप रहने से उत्तराखंड की पर्यटन, तीर्थाटन आधारित अर्थव्यवस्था 55 फीसदी से ज्यादा के नुकसान पर पहुंच चुकी है। हालांकि सरकार और यात्रा कारोबारी अब भी उम्मीद कर रहे हैं कि कोरोना की मार कमजोर होती है तो वह बाकी बची संभावना का लाभ लेने की स्थिति में आ सकते हैं। वैसे, इस साल अप्रैल से पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि यात्रा पर लगातार दूसरे साल इस तरह की चोट पड़ने जा रही है। पिछले साल कोरोना संक्रमण की स्थिति के बीच सरकार ने प्रतीकात्मक तौर पर यात्रा का संचालन किया था। बेहद पाबंदियों के बीच करीब 30 हजार श्रद्धालु यात्रा पर आए थे, जबकि इससे पहले 2019 में चार धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 34 लाख से ज्यादा रही थी। कोरोना काल में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में कोई भी अभी अनलाॅक नहीं हो पाया है, जबकि तीन जिलों में संक्रमण की दर पांच फीसदी से नीचे आ चुकी है। हालांकि सरकार संक्रमण दर कम होने पर जिलों को खोलने की तैयारी करने लगी है। इन स्थितियों के बीच चार धाम यात्रा के संचालन की मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी क्या हो, इस पर भी नीति नियंता माथापच्ची कर रहे हैं। आज की स्थिति में उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों से पर्वतीय क्षेत्रों में जाने वाले लोगों के लिए 72 घंटे पुरानी कोरोना जांच अनिवार्य है। ऐसे में दूसरे प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बहुत जल्द चार धाम की राह आसान होगी, ऐसा नहीं माना जा सकता। पिछले साल की तरह ही, सरकार स्थिति सामान्य होने पर सबसे पहले चार धाम यात्रा वाले संबंधित जिलों के लोगों और बाद में पूरे प्रदेश के लोगों के लिए यात्रा की राह आसान कर सकती है। इसके बाद दूसरे प्रदेशों का नंबर आएगा। दरअसल, सरकार कोरोना काल में एहतियाती उपाय सुनिश्चित करते हुए यात्रा कारोबारियों के हितों के लिए भी काम करना चाहती है, क्योंकि यह सच्चाई है कि इस साल भी यात्रा यदि बुरी तरह चौपट हो गई, तो फिर इससे जुडे़ कारोबारियों का अपने पैरों पर खड़ा होना बेहद मुश्किल हो जाएगा। पिछले दिनों सरकार के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के आंकलन को सामने रखा है, जिसमें यात्रा संचालित न होने से 11 हजार करोड़ से ज्यादा के नुकसान की बात कही गई है। महाराज का कहना है कि स्थिति सामान्य होते ही यात्रा संचालित की जाएगी, ताकि कारोबारियों को और नुकसान न उठाना पडे़ और श्रद्धालुओं की आस्था का भी सम्मान हो सके। हिन्दुस्थान समाचार/विपिन बनियाल