जन औषधि केंद्रों पर दवाइयों की कमी पर हाई कोर्ट ने केन्द्र व राज्य से मांगा जवाब
जन औषधि केंद्रों पर दवाइयों की कमी पर हाई कोर्ट ने केन्द्र व राज्य से मांगा जवाब
उत्तराखंड

जन औषधि केंद्रों पर दवाइयों की कमी पर हाई कोर्ट ने केन्द्र व राज्य से मांगा जवाब

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नैनीताल, 08 जुलाई (हि.स.)। हाई कोर्ट में सरकारी अस्पतालों में खुले जन औषधि केंद्रों पर पिछले लंबे समय से दवाइयों की भारी कमी व वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने के दौरान केन्द्र और राज्य के आयुष विभाग को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी समाजसेवी अमित खोलिया ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नैनीताल जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में गरीबों को बाजार मूल्य से कम दामों पर जेनरिक दवाइयों को उपलब्ध कराने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 01 जुलाई 2015 को जन औषधि केंद्रों को खोला गया था, इसका जिम्मा रेडक्रॉस सोसायटी को सौंपा गया था। याचिका में कहा गया है कि लंबे समय से औषधि केंद्रों पर दवाइयां ही उपलब्ध नहीं हैं। कोरोना संकट में लोग बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने के लिये मजबूर हैं। याचिका में कहा कि यहां आई ड्राप के अलावा कुछ भी उपलब्ध नही है। याचिका में मांग की गई है कि केंद्रों का संचालन रेडक्रॉस से हटा कर किसी अन्य संस्था को दिया जाए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इसे गंभीर मानते हुए औषधि सचिव भारत सरकार, औषधि ब्यूरो भारत सरकार, स्वास्थ्य सचिव उत्तराखंड, जिला रेडक्रॉस सोसायटी नैनीताल सहित रेडक्रॉस सोसायटी उत्तराखंड को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। हिन्दुस्थान समाचार / लता नेगी-hindusthansamachar.in