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उत्तराखंड

ब्राह्मण महासभा ने मांगा आरक्षण और अगला मुख्यमंत्री

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नैनीताल, 04 अप्रैल (हि.स.)। अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष पंडित विशाल शर्मा ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उत्तराखंड में 22 लाख यानी राज्य की जनसंख्या के 20 फीसद ब्राह्मण हैं। फिर भी ब्राह्मणों के बच्चे अच्छे प्रदर्शन के बावजूद सरकारी नौकरियां प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। फलस्वरूप वह आत्महत्या कर रहे हैं। इसलिए अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा ब्राह्मणों के लिए गुजरात व पंजाब की तरह आरक्षण की मांग करती है। उन्होंने कहा कि करीब 40 हजार सदस्य संख्या वाली महासभा आगामी विधानसभा चुनाव में उसी पार्टी का सहयोग करेगी जो अपने चुनावी एजेंडे में साफ तौर पर ब्राह्मणों को आरक्षण देने की घोषणा करेंगे। उन्होंने राज्य में पिछले 10 वर्षों से एक ही जाति विशेष से मुख्यमंत्री से होने की बात करते हुए राज्य में अगला मुख्यमंत्री ब्राह्मण समुदाय से बनाने की मांग भी की। उन्होंने राज्य सरकार में 90 फीसद पद एक ही जाति विशेष के लोगों के पास और पिछली सरकारों में भी 90 फीसद दायित्व इसी जाति विशेष के लोगों के पास होने का दावा करते हुए याद दिलाया कि ब्राह्मण शास्त्रों के साथ ही शस्त्रों में भी निपुण हैं। परशुराम उनके आदि भगवान हैं। इसलिए वे प्रारंभिक तौर पर भगवान परशुराम की जयंती 14 मई को उसी तरह अवकाश घोषित करने की मांग कर रहे हैं, जैसे राज्य में बेहद कम जनसंख्या के बावजूद छठ पूजा व गुड फ्राइडे को अवकाश होते हैं। उन्होंने कहा कि 14 मई को राज्य के 10 हजार ब्राह्मणों का सर्वदलीय सम्मेलन हल्द्वानी में होगा। उन्होंने दोहराया कि राज्य में एक जाति की 90 फीसद हिस्सेदारी को छोड़कर शेष 10 फीसद में ब्राह्मण सहित सभी जातियों का प्रतिनिधित्व रहता है। उन्होंने कहा कि देश में या तो आरक्षण की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए, अथवा आर्थिक आधार पर ब्राह्मणों को आरक्षण दिया जाए। इस मौके पर महासभा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजू पांडे व हल्द्वानी के नगर महामंत्री ललित मोहन पांडे भी मौजूद रहे। हिन्दुस्थान समाचार/डॉ.नवीन जोशी/मुकुंद