मोती बाग के बाद अब रैबासा की दी सौगात

मोती बाग के बाद अब रैबासा की दी सौगात
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बुजुर्ग किसान विद्यादत्त शर्मा के मोती बाग में होम स्टे रैबासा का हुआ शुभारंभ लघु उद्यम व हर्बल गार्डन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार देने की है योजना पौड़ी, 14 अप्रैल (हि.स.)। विकासखंड कल्जीखाल के सांगुणागांव ने अब क्षेत्र को मोती बाग के बाद रैबासा की नई सौगात दी है। जो ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने में अहम साबित होगा। यहां बुजुर्ग किसान विद्यादत्त शर्मा ने रैबासा होम स्टे का शुभारंभ कर लोगों को अपने गांवों से जुड़ने का आह्वान किया। रैबासा संकल्पना को साकार रूप में अहम रूप देने वाले बुजुर्ग किसान के बेटे त्रिभुवन उनियाल ने कहा कि मोती बाग रैबासा के बाद गांव में लघु उद्यम व हर्बल गार्डन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। बुधवार को कल्जीखाल विकासखंड के सांगुड़ा गांव में रैबासा होम स्टे का उद्घाटन किया गया। रैबासा होम स्टे का निर्माण क्षेत्र के बुजुुर्ग किसान विद्यादत्त शर्मा ने किया है। शर्मा के जीवन पर बनी डाक्यूमेंट्री फिल्म मोती बाग ऑस्कर के लिए चयनित हो चुकी है। डाक्यूमेंट्री में शर्मा के नायब तहसीलदार सर्वेयर के पद छोड़ने के बाद वर्ष 1965 में खेती करने, 52 वर्षो की मेहनत से खेती के मॉडल के रूप में पेश करने, साहित्य सृजन सहित उनके जीवन के हर पहलू को दिखाया गया है। शर्मा द्वारा विकसित किए गए बाग को मोती बाग के नाम से जाना जाता है। उन्होंने जल संरक्षण के लिए वर्ष 1976 में सुखदेई जलाशय भी बनाया। 1975 से शर्मा मधुमक्खी पालन में भी जुटे हैं। उन्हें उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से डाक्टरेट की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है। आज रैबासा के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि युवाओं को गांव में रोजगार प्रदान हो। शर्मा ने कहा कि पलायन एक महामारी का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि आज का युवा महानगरों में आजीविका की खोज कर रहा है जबकि गांवों में आजीविका के प्रचुर संसाधन हैं। इन्हें पहचान कर अपनाने की आवश्यकता है। रैबासा होम स्टे पूर्ण रूप से पहाड़ी शैली का बनाया गया है। जहां लक्ष्मी खोली, बदरी खोली, केदारखोली व दीनानाथ रसोई बनाई गई है। कार्यक्रम में संजय, सुनील बड़थ्वाल ने भी विचार व्यक्त किए। हिन्दुस्थान समाचार/राज