स्वामी शिवानंद सरस्वती के गंगा सत्याग्रह के समर्थन में रखा सामूहिक उपवास
स्वामी शिवानंद सरस्वती के गंगा सत्याग्रह के समर्थन में रखा सामूहिक उपवास
उत्तराखंड

स्वामी शिवानंद सरस्वती के गंगा सत्याग्रह के समर्थन में रखा सामूहिक उपवास

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विश्वभर के लोगों ने किया गंगा सत्याग्रह हरिद्वार, 10 अगस्त (हि.स.)। मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती के चल रहे गंगा सत्याग्रह को सोमवार को विश्वभर के गंगा प्रेमियों ने सत्याग्रह करते हुए स्वामी शिवानंद को अपना समर्थन दिया, जिससे गंगा बचाने की मुहिम एक बार फिर से तेज होती दिखायी दे रही है। स्वामी शिवानंद 3 अगस्त से गंगा रक्षा के लिए आमरण अनशन पर हैं। स्वामी शिवानंद के गंगा सत्याग्रह को जलपुरूष राजेन्द्र सिंह ने अपना समर्थन देते हुए एक दिनी उपवास की घोषणा की थी। इसी के चलते सोमवार को जलपुरूष राजेन्द्र सिंह के साथ फिलिप यूके, फ्रांस में इड़िट, टमेरा में मार्टिन, मिनी जैन लंदन, ईथन यू.एस, स्वीडन ऋषभ खन्ना व सुनीता राऊत, भारत में जलपुरुष राजेन्द्र सिंह के साथ 108 से ज्यादा जगहों पर उपवास शुरू हुआ। इसके साथ केरल से राजगोपाल पीवी, बेंगलुरू से आरएच साहूकार, बीआर पाटिल, तमिलनाडु में गुरुस्वामी, उडिशा में सुदर्शन दास, उत्तर प्रदेश में संजय सिंह, महाराष्ट में डॉ. विनोद बोदनकर, धर्मराज, नरेन्द्र चुग, आन्ध्रप्रदेश में, वसुदेव, पारस प्रताप, मध्यप्रदेश डॉ कृष्णपाल, मेरठ चमन सिंह समेत तरुण भारत संघ, जल बिरादरी व परमार्थ के समस्त कार्यकर्ता उपवास पर बैठे। इस अवसर पर राजेन्द्र सिंह ने अपने संदेश में कहा कि गंगा स्वच्छता के लिए सरकारों ने हजारों करोड़ खर्च किये लेकिन मां गंगा अधिक बीमार हो गई है। मां गंगा के लिए खर्च करने की जरूरत नहीं है। यह कोरोना ने साबित कर दिया कि यदि आप मां गंगा में गंदगी नही डालेगें तो मां फिर से आजाद होकर अविरल-निर्मल व पवित्र होकर बहने लगेगी लेकिन सरकारें गंगा जी पर खर्च किये ही जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गंगा पर रुपया खर्च करने की जरूरत नहीं है, आवश्यकता है कानून बनाने की। मां गंगा की तीन बीमारी है- पहली है मां गंगा की जमीन पर अतिक्रमण, दूसरी मां गंगा का प्रवाह जो खनन और बांधों से रोक दिया गया है, तीसरी उद्योगों द्वारा प्रदूषण। यदि इन पर कार्य किया जाए तो गंगा स्वच्छ हो जाएगी। उन्होंने कहाकि प्रो. जी.डी. अग्रवाल ने आमरण अनशन करके मां गंगा की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। स्वामी निगमानंद जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। स्वामी नागनाथ ने भी बनारस में प्राणों का बलिदान दिया था। भारत के अलग-अलग जगहों पर, जिनके मन, आंखों और हृदय में गंगा जी बहती है, वे सभी संकल्प लेकर अपना संकल्प पूरा कर रहे हैं। जलपुरुष को सत्याग्रह को समर्थन देने बड़ी संख्या में अलग-अलग दल पहुंचे। गंगा प्रेमियों की मांग है कि गंगा में खनन और नए बांध गंगा की ऊपरी धाराओं पर नहीं बनें। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत सरकार को कहा है कि स्वामी निगमानंद और स्वामी सानंद की तरह किसी और तीसरे व्यक्ति को ऐसा न करना पड़े। इसलिए अब दुनिया में गंगा बचाने की चेतना जगाने का यह उपवास रखा है। इसकी गूंज अब संयुक्त राष्ट्र में भी शुरुआत हो गई है। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत-hindusthansamachar.in