सैलानियों को बुला रही तितलियों की दुनिया
सैलानियों को बुला रही तितलियों की दुनिया
उत्तराखंड

सैलानियों को बुला रही तितलियों की दुनिया

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-क्यारी गांव में तितली त्योहार का समापन 15 सितम्बर को रामनगर, 12 सितम्बर ( हि.स.)। कोरोना की मार से बेहाल जिम कॉर्बेट पार्क के आसपास पर्यटन उद्योग को तितलियों ने उम्मीद की रोशनी दिखाई है। यहां क्यारी गांव में 1 सितम्बर से "तितली त्योहार" के जरिये तितलियों के संसार से सैलानियों व स्थानीय लोगों को रूबरू करवाया जा रहा है। यूं तो कॉर्बेट अपने बाघों, हाथियों व परिंदों के लिए मशहूर है, मगर तितलियों की यहां 150 से ज्यादा किस्में दिखाई देती हैं। तितली त्योहार का समापन 15 सितम्बर को है। आयोजक संस्था इटरुपर्स के मनीष कुमार ने बताया कि तितलियों की विभिन्न प्रजातियों को आने वाली पीढ़ी मोबाइल पर या किसी चित्र के माध्यम से ही न देखे बल्कि ‘हमारा प्रयास तितलियों की प्रजातियों के लिए अधिक संख्या में ऐसे पौधों की पहचान करना है जो तितलियों को आकर्षित कर सकें, जो उनके प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बना सकें जहां यह तितलियां प्रजनन कर सकें। ताकि क्यारी गांव विश्व में इन कीटों के लिए पसंदीदा स्थान बन जाए। तितली त्योहार में अब तक सैकड़ों लोग शामिल हो चुके हैं। इनमें स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। प्रकृति प्रेमी संजय छिमवाल व गौरव खुल्वे प्रतिभागियों के सामने बटरफ्लाई के पूरे जीवन चक्र को वर्णन कर रहे हैं और सबको बता रहे हैं कि छोटा जीवन होने के बाद भी प्रकृति के लिए तितलियों का क्या महत्व है। कार्यक्रम में शामिल होने आए कल्पतरु संस्था के मितेश्वर आनंद ने कहा की तितलियां रोजमर्रा के जीवन में कई बार देखते थे, लेकिन यहां आकर उनके महत्व का पता चला। तितलियों की अलग अलग प्रजातियों से रूबरू हुए और ये भी पता चला की तितलियों के अधिक से अधिक संख्या व प्रजातियों के किसी एक जगह पर होना जैसे उस जगह की जैव विविधता का एक समृद्ध सूचक होता है। नेचर गाइड समिति के अध्यक्ष अनिल चौधरी "तितली त्योहार" से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताते हैं। तितलियों की अनूठी दुनिया जंगल के बीच क्यारी खाम गांव में है। पहाड़ियों और जंगल से घिरे गांव में चारों तरफ हरियाली है। जंगल व पहाड़ियों और खिचड़ी व दाबका नदी के समीप स्थित क्यारी गांव विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान से ज्यादा दूर नहीं है। 1500 से अधिक प्रजाति की तितलियां दुनिया में है । तितलियों को देखने का सबसे अच्छा समय जब सूर्योदय के बाद या जब सूर्यास्त की ओर होता है। तितली एक बार मैे 100 या उससे अधिक अंडे देती है। वन्य जीव जानकार गौरव खुल्बे ने बताया कि तितली त्योहार का मुख्य उद्देश्य लोगों को एक पर्यटक की जगह एक यात्री के तौर पर जागृत करने का है। तितली त्योहार में प्लैन टाइगर, कॉमन येलो, ग्रास ऑर्चित टिट, कॉमन ग्रास येल्लो, जेन्ट रेड आई, पीब्लू, गौडी बैरन, ऑरेंज अवलेट, फॉरगेट मी नोट, लस्कार, कॉमन जेज़बेल, कॉमन वनडरर, ग्रेट एग्गफलाई, कॉमन मॉरमॉन, कॉमन लेपर्ड, कमान फोर बेरोनेट, कमांडर, स्ट्रिप ब्लू क्रो, गौडी बैरन, ऑरेंज अवलेट, फॉरगेट मी नोट, कॉमन लस्कार, फोर रिंग,, गौडी बैरन, ऑरेंज अवलेट आदि तितलियां देखने को मिल रही हैं। हिन्दुस्थान समाचार/गणेश रावत/मुकुंद-hindusthansamachar.in