सिंचाई विभाग की जमीन पर बसे व्यापारी प्रशासन से नाराज
सिंचाई विभाग की जमीन पर बसे व्यापारी प्रशासन से नाराज
उत्तराखंड

सिंचाई विभाग की जमीन पर बसे व्यापारी प्रशासन से नाराज

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देहरादून, 14 अक्टूबर (हि.स.)। प्रशासन के विरुद्ध सिंचाई विभाग की जमीनों पर कारोबार कर रहे लोगों में जमकर नाराजगी है। उच्च न्यायालय नैनीताल के निर्देश पर दून में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान से लोगों और व्यापारियों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी सड़कों पर आ गई है। पूरा देश अभी कोरोना संकट से मुक्त भी नहीं हुआ था कि मंदी के इस दौर में इस तोड़फोड़ ने व्यापारियों के सामने एक बार फिर से रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। दिलाराम बाजार में सिंचाई विभाग की पट्टे की जमीन पर बसे लोगों द्वारा इस कार्रवाई का विरोध किया गया। यहां पर मालिक सिंचाई विभाग है लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति के लिए प्रशासन ने जबरन व्यापारियों की दुकानों को तोड़ दिया। दिलाराम बाजार में उत्तर प्रदेश के समय से ही काफी लोग सिंचाई विभाग की पट्टे की भूमि पर बसे हुए हैं। इन लोगों के लिए 10 जनवरी 2002 में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश शासन द्वारा निर्गत किए गये थे। उसके बाद नौ अगस्त 2018 में भी शासन द्वारा पट्टे की जमीनों पर यथास्थिति बनाये रखने के आदेश किए गये। दिलाराम बाजार में जो भूमि लोगों को दी गई है, उसका मालिकाना हक आज भी सिंचाई विभाग का है तो उस पर कार्रवाई करने का अधिकार भी विभाग के पास ही है, लेकिन अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत प्रशासन ने इस पर भी गौर नहीं किया और सिंचाई विभाग की जमीन पर बसे लोगों की दुकानों को ही उजाड़ दिया। अतिक्रमण हटाने के लिए आए एसडीएम मसूरी को जब यहां के दुकानदारों ने जब सिंचाई विभाग का आदेश दिखाना चाहा तो एसडीएम ने इसे देखने से इंकार कर दिया। आरोप है कि जबरन दुकानों को तोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर तो शहर में रिंग रोड के समीप छह नंबर स्थित सब्जी मंडी में नगर निगम द्वारा सब्जी विक्रेताओं को मॉडर्न ठेलियां दे कर उन्हें रोजगार के साधन उपलब्ध कराये जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर सिंचाई विभाग की लीज की जमीन पर बसे हुए लोगों के खिलाफ जबरन प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है। अतिक्रमण हटाओ अभियान पर दिलाराम चौक निवासियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिंचाई विभाग से लीज बढ़ाने के लिए उनकी वार्ता चल रही है। सात दुकानदारों के पास हाईकोर्ट से स्टे भी है। इसके बावजूद प्रशासन ने उनकी एक नहीं सुनी। हिन्दुस्थान समाचार/ साकेती/मुकुंद-hindusthansamachar.in