सरकार नहीं दे पाई सड़क तो  महिलाओं- बच्चों ने उठाया फावड़ा
सरकार नहीं दे पाई सड़क तो महिलाओं- बच्चों ने उठाया फावड़ा
उत्तराखंड

सरकार नहीं दे पाई सड़क तो महिलाओं- बच्चों ने उठाया फावड़ा

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नैनीताल, 01 अगस्त (हि.स.)। शायद इसे ही ‘चिराग तले अंधेरा’ कहते हैं और इसे पहाड़ के विकास की असली तस्वीर भी कहा जा सकता है। जिला व मंडल मुख्यालय के नजदीकी क्षेत्र भी आजादी के सात से अधिक दशक बीत जाने के बावजूद विकास की मुख्य कड़ी कही जाने वाली सड़क से वंचित हैं। यह हाल नगर से मात्र 26 किलोमीटर दूर स्थित प्राकृतिक सुंदरता एवं कृषि उपज के लिए प्रसिद्ध रोखड़ ग्राम सभा का है। इस ग्राम सभा के लिए 1996 में खमारी-थापला-मंगोली-देचौरी सड़क प्रस्तावित की गई थी, किंतु ढाई दशक बीतने के बावजूद अब भी इस गांव के लोगों को सड़क तक आने के लिए सात किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। इस पर ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। ग्रामीणों के साथ महिलाओं, स्कूली छात्राओं व बच्चों ने भी किताबों की जगह हाथों में गैंठियां, बेलचे, फावड़े आदि उठा लिये हैं। वे बरसात में भी बिना थमे गांव के लिए श्रमदान कर सड़क बनाने में जुट गए हैं। ग्रामीणों की इस कार्य में अगुवाई कर रहे विक्रम बिष्ट का कहना है कि ग्रामीण करीब आधा किलोमीटर सड़क खोद भी चुके हैं। उनकी कोशिश सो चुकी व्यवस्था को नींद से जगाने की है। ग्राम प्रधान योगेश्वर जीना का कहना है कि सड़क की फाइल 1996 से वन भूमि हस्तांतरण के कारण फंसी है। ग्रामीण महिलाएं ममता देवी, हेमा सनवाल व स्कूली छात्र दिव्यांशु आदि भी इस मामले में जनप्रतिनिधियों के प्रति काफी आक्रोशित हैं। वहीं इस बारे में पूछे जाने पर क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने कहा कि इतने वर्षों में क्या हुआ, वे कह नहीं सकते, किंतु इतना निश्चित है कि इस सड़क को वे ही रौखड़ गांव पहुचाएंगे। हिन्दुस्थान समाचार/नवीन जोशी/मुकुंद-hindusthansamachar.in