वामपंथी संगठनों ने विभिन्न मांगों को लेकर दिया धरना
वामपंथी संगठनों ने विभिन्न मांगों को लेकर दिया धरना
उत्तराखंड

वामपंथी संगठनों ने विभिन्न मांगों को लेकर दिया धरना

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गोपेश्वर, 23 जुलाई (हि.स.)। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, अखिल भारतीय किसान सभा व सीटू कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को संयुक्त रूप से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय परिसर के सामने धरना दिया। वामपंथी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को संबाेधित एक ज्ञापन प्रधानमंत्री को भेजा। अपने ज्ञापन में किसान सभा व सीटू कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि कोरोना संकट के दौर में देश की जनता के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य व्यवस्था किए जाने, कोरोना के चलते गरीब परिवारों को छह माह तक प्रतिमाह दस किलो खाद्यान्न देने, गैर आयकर परिवारों को 7500 रुपये प्रतिमाह दिया जाये। अखिल भारतीय किसान सभा का कहना था कि मनरेगा में प्रत्येक परिवार को दो सौ दिन का रोजगार दिया जाना चाहिए तथा वर्तमान समय में मजदूरी दरों को भी छह सौ रुपये प्रतिदिन किया जाना चाहिए। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि श्रम कानून संशोधन व कृषि उपज वाणिज्य कानून को भी रद्द किया जाना चाहिए। उत्तराखंड में बंदरों व सुअरों को हिमांचल की भांति किसानों का दुश्मन घोषित कर उन पर नियंत्रण की व्यवस्था तत्काल की जाए। तथा कृषि के नुकसान की भरपाई कर किसानों को राहत दी जाए। धरने पर बैठी अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की ओर से दिये गये ज्ञापन में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार सभी चिकित्सालयों में डाॅक्टरों की तैनाती की जाए, सार्वजनिक स्वास्थ्य का बाजारीकरण बंद हो, निजी क्षेत्र के अस्पतालों पर भी सरकार का नियंत्रण हो, कोविड संक्रमित परिवारों का निःशुल्क इलाज किया जाए व कोरोना योद्धाओं को समुचित सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाया जाए। धरना देने वालों में भूपाल सिंह रावत, राजपाल कन्याल, गीता बिष्ट, मीना बिष्ट, पुष्पा किमोठी, उषा बिष्ट, संजय रावत, ज्ञानेंद्र खंतवाल, नरेंद्र सिंह रावत सहित कई लोग शामिल थे। हिन्दुस्थान समाचार/जगदीश-hindusthansamachar.in