लावारिस अस्थियां गंगा में विसर्जित
लावारिस अस्थियां गंगा में विसर्जित
उत्तराखंड

लावारिस अस्थियां गंगा में विसर्जित

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हरिद्वार 16 सितम्बर (हि. स.)। हिन्दी कश्मीरी संगम और धर्म यात्रा महासंघ के तत्वावधान में कनखल के सती घाट पर लावारिस अस्थियों को गंगा में पूर्ण वैदिक विधि विधान से विसर्जित किया गया। इस मौके पर शारदा सर्वज्ञ पीठ के स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ ने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान, आधुनिकतावाद, बाजारवाद के चलते सनातन धर्म लुप्त हो रहा है। भारतीय संस्कृति की परंपराओं को बचाने का समय आ गया है। जो सनातन धर्म की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं, उनका कार्य वंदनीय और पूजनीय है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पूजा माई ने कहा लावारिस आत्माओं को मोक्ष दिलाने से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है। इसीलिए वे दिल्ली से हरिद्वार आकर अस्थि विसर्जन के कार्यक्रम में सम्मिलित हुई हैं। उन्होंने यात्रा संयोजक डॉ. बीना बुंदकी को अपनी मां की संज्ञा दी। रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने भारत के विभिन्न राज्यों से लावारिस अस्थियों को लाकर मां गंगा में विसर्जित करने के लिए दोनों संगठनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. बीना बुंदकी ने कहा कि जीवनकाल में सभी लोग साथ रहते हैं। किन्तु मरणोपरांत मनुष्य के कर्म ही उनके साथ जाते हैं। पंडित जितेन्द्र शास्त्री और पंडित नितिन माना ने पूर्ण विधि विधान से अस्थियों को मां गंगा में प्रवाहित कराया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रजनीकांत शुक्ला ने किया। इस मौके पर धर्मयात्रा महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष काशीनाथ, प्रांतीय महामंत्री अशोक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष उपेन्द्र गुप्ता, उपाध्यक्ष ललिता मिश्रा, विश्व हिंदू परिषद की प्रांतीय उपाध्यक्ष संध्या कौशिक, जानकी प्रसाद, यशपाल, मंजू अग्रवाल, सुषमा मिश्रा, पं चन्द्र प्रकाश शुक्ला आदि मौजूद रहे। हिन्दुस्थान समाचार/ रजनीकांत / मुकुंद-hindusthansamachar.in