ब्रह्मलीन बापू गोपालानन्द दिव्य महापुरूष थेः कैलाशानन्द
ब्रह्मलीन बापू गोपालानन्द दिव्य महापुरूष थेः कैलाशानन्द
उत्तराखंड

ब्रह्मलीन बापू गोपालानन्द दिव्य महापुरूष थेः कैलाशानन्द

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हरिद्वार, 10 सितम्बर (हि.स.)। अग्नि अखाड़े के सभापति ब्रह्मलीन बापू गोपालानन्द ब्रह्मचारी महाराज की द्वितीय पुण्यतिथि पर उनके शिष्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द ब्रह्मचारी महाराज ने नीलधारा तट स्थित श्री दक्षिण काली मन्दिर में सभी सदस्यों सहित श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने सभी को ब्रह्मलीन बापू गोपालानंद ब्रह्मचारी महाराज के विचारों व उनके कृतित्व से प्रेरणा लेते हुए समाज सेवा का संकल्प दिलाया। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि गुरु की कृपा से ही व्यक्ति दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तत्वों की प्राप्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन बापू गोपालानंद ब्रह्मचारी एक महान संत तथा दिव्य महापुरूष थे। जिन्होंने अपने तप व विद्वता के माध्यम जीवन पर्यन्त भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म की पताका को पूरे विश्व में प्रचारित प्रसारित किया और अनेकों सेवा प्रकल्पों का संचालन कर गरीब असहायों की सेवा करते हुए राष्ट्र कल्याण में अपना अहम योगदान प्रदान किया। उन्होंने कहा ब्रह्मलीन बापू गोपालानन्द ब्रह्मचारी महाराज संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। इस दौरान अंकुश शुक्ला, सागर ओझा, पंडित प्रमोद पाण्डे, पंडित शिवकुमार, अनुराग वाजपेयी, अनुज दुबे आदि उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत-hindusthansamachar.in