पतंजलि का 120 सदस्यीय दल चरेख डाण्डा पहुंचा
पतंजलि का 120 सदस्यीय दल चरेख डाण्डा पहुंचा
उत्तराखंड

पतंजलि का 120 सदस्यीय दल चरेख डाण्डा पहुंचा

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हरिद्वार, 17 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के तत्वावधान तथा पतंजलि अनुसंधान संस्थान के सहयोग से महर्षि चरक की जन्मस्थली चरेख डाण्डा में औषधीय पौधों के अभिलेखिकरण, हर्बेरियम तैयार करने व शोध संबंधी कार्य प्रस्तावित हैं। यह कार्य अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान परिसर में प्रस्तावित है। सम्पूर्ण कार्य के क्रियान्वयन व अग्रिम अवलोकन के लिए पतंजलि योगपीठ का 120 सदस्यीय दल चरेख डाण्डा पहुंचा। दल की अध्यक्षता स्वयं पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने की। उत्तराखंड की सुरम्य पहाड़ियों में स्थित महर्षि चरक की तपस्थली चरेख-डाण्डा में भ्रमण करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह भूमि आयुर्वेद के महान वैज्ञानिक महर्षि चरक की है। यह स्थान दिव्य, भव्य व अनुपम है। यहां से आयुर्वेद का वृहद व व्यापक कार्य पतंजलि योगपीठ के माध्यम से किया जाना है। पतंजलि की भावी योजना में इस स्थान पर जड़ी-बूटियों का रोपण, नर्सरी व ग्रीन हाउस इत्यादि का निर्माण शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल आयुर्वेद को प्रामाणिक औषधि का दर्जा दिलाने में सहायता मिलेगी अपितु पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार का सृजन भी होगा। उन्होंने बताया कि यहां औषधीय पौधों में विशेष तौर पर गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा इत्यादि का रोपण किया जाएगा। सभी वैज्ञानिक आयुर्वेद के क्षेत्र में और भी ज्यादा काम करने के संकल्प के साथ ऊर्जा से परिपूर्ण होकर लौटे। दल में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सुनील जोशी, पतंजलि अनुसंधान संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वाष्र्णेय, पतंजलि विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार, डॉ. राजेश मिश्र, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तथा पतंजलि अनुंसधान संस्थान के वैज्ञानिक शामिल थे। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/मुकुंद-hindusthansamachar.in