नवरात्र में 58 वर्षों बाद पड़ रहा शुभ संयोग
नवरात्र में 58 वर्षों बाद पड़ रहा शुभ संयोग
उत्तराखंड

नवरात्र में 58 वर्षों बाद पड़ रहा शुभ संयोग

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पड़ोसी देशों से और बढ़ सकता है तनाव हरिद्वार, 15 अक्टूबर (हि.स.)। अधिकमास के कारण इस बार शारदीय नवरात्रि करीब एक माह की देरी से आरंभ हो रहे हैं। सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व शक्ति की उपासना के पर्व के रूप में मनाया जाता है। पं. देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री के मुताबिक 16 अक्टूबर को अधीमास खत्म हो रहा है। इसके अगले दिन 17 से नवरात्रि शुरू होकर 24 अक्टूबर तक रहेंगे जबकि विजयदशमी (25 अक्टूबर) को मनाई जाएगी। शास्त्री के मुताबिक इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रही है। आश्विन मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाएगी। इस बार नवरात्रि पर 58 साल के बाद शुभ संयोग बन रहा है। एक तो अधीमास के बाद नवरात्र पड़ रहे हैं। वहीं 58 वर्षों के बाद शनि और गुरू दोनों ही स्वयं की राशि में मौजूद रहेंगे। शनि अपनी राशि मकर में और गुरु अपनी राशि धनु में हैं। इस शुभ संयोग पर कलश स्थापना के साथ नवरात्रि पर बहुत ही शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर चित्रा नक्षत्र रहेगा। साथ ही मां दुर्गा के समय से देवी का वाहन घोड़ा रहेगा। जिस कारण पड़ोसी देशों के साथ संबंध कटू हो सकते हैं। शास्त्री के मुताबिक 24 अक्टूबर को सूर्योदय पर अष्टमी और दोपहर में नवमी होने के कारण उसी दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र का समापन होगा। इसलिए धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार, अगले दिन शाम के समय यानी विजय मुहूर्त में दशमी तिथि होने से 25 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाना चाहिए। देवी भागवत के अनुसार इस बार शनिवार को घट स्थापना होने से देवी का वाहन घोड़ा रहेगा। इसके प्रभाव से पड़ोसी देश से तनाव बढ़ने की आशंका है और देश में राजनीतिक उथल-पुथल भी हो सकती है। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत-hindusthansamachar.in