धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकर की ध्वनि तय करने पर हाई कोर्ट की खंडपीठ के जजों में नहीं बनी सहमति
धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकर की ध्वनि तय करने पर हाई कोर्ट की खंडपीठ के जजों में नहीं बनी सहमति
उत्तराखंड

धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकर की ध्वनि तय करने पर हाई कोर्ट की खंडपीठ के जजों में नहीं बनी सहमति

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नैनीताल, 24 जुलाई (हि.स.)। धार्मिक स्थलों पर पांच डेसीबल से ज्यादा ध्वनि पर हाई कोर्ट के दो जजों की अलग-अलग राय है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन की पीठ ने माना है कि ध्वनि प्रदूषण के रूल्स के अनुरूप लाउडस्पीकर का इस्तेमाल हो सकता है, जबकि न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह ने पूर्व में दिए आदेश पर ही अपनी सहमति जताई है। हाई कोर्ट ने 19 जून 2018 को आदेश में राज्य में लाउडस्पीकर की आवाज को 5 डेसीबल निर्धारित किया था। इस आदेश के खिलाफ उत्तराखंड वक्फ बोर्ड़ के सदस्य मुनब्बर अली ने संशोधन याचिका दाखिल कर कहा था कि जो ध्वनि प्रदूषण के रुल्स हैं, उनमें साफ तौर पर दिन व रात के लिये अलग-अलग मानक निर्धारित है। लेकिन हाई कोर्ट ने इसको पांच डेसीबल कर दिया है। याचिका में डाउडस्पीकर की आवाज को वर्ष 2000 में बने नियमों के अनुरूप करने की मांग की गई थी। अब दो जजों की राय भिन्न होने पर इस मामले का निर्णय हाईकोर्ट की तीसरी बेंच करेगी। हिन्दुस्थान समाचार / लता नेगी-hindusthansamachar.in