कथाकार शैलेश मटियानी को किया गया याद
कथाकार शैलेश मटियानी को किया गया याद
उत्तराखंड

कथाकार शैलेश मटियानी को किया गया याद

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नैनीताल, 14 अक्टूबर (हि.स.)। ’बुरांश साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच’ द्वारा बुधवार को हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार शैलेश मटियानी की 89वीं जयंती पर शैलेश मटियानी: जीवन और साहित्य’ शीर्षक से ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में युवा कवि डॉ. अनिल कार्की ने कहा कि शैलेश मटियानी भारत के ही नही अपितु एक वैश्विक कथाकार थे। उनके साहित्य में जीवन का भोगा हुआ यथार्थ है। स्त्री तथा दलित चरित्रों का चित्रण उन्होंने अपने साहित्य में सशक्त रूप से किया है। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता विज्ञान कथाकार देवेंद्र मेवाड़ी ने शैलेश मटियानी के साथ व्यतीत किए हुए समय को याद करते हुए कहा कि वे अक्सर जीवन में कभी हार नही मानने की बात करते थे। शैलेश मटियानी की पुत्री डॉ. शुभा मटियानी ने भी पिता को याद करते हुए उनके जीवन व साहित्य पर अपने विचार रखे। इनके अतिरिक्त कुशीनगर के डॉ. विवेक चतुर्वेदी, रुद्रपुर के डॉ. विवेकानंद पाठक ने भी शैलेश मटियानी के साहित्य एवं जीवन पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र पाण्डेय ने शैलेश मटियानी के इलाहाबाद में बिताए हुए समय को याद करते हुए कहा कि शैलेश मटियानी एक संघर्षशील एवं जनता से जुड़े हुए कथाकार थे। क्रार्यक्रम में आयोजक संस्था की संरक्षक प्रो. चन्द्रकला रावत, प्रो. निर्मला ढैला बोरा, प्रो शिरीष कुमार मौर्य तथा मार्गदर्शक मण्डल के सदस्य डॉ. शशि पांडेय, डॉ कुसुम लता, मेघा नैनवाल एवं हिंदी विभाग के शोधार्थी सम्मिलित रहे। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन अरविंद कुमार मौर्य ’अनन्त’ ने किया। आयोजक संस्था के सचिव धनन्जय द्विवेदी, सह सचिव चन्द्रमा प्रसाद, प्रसार प्रमुख जया बरनवाल भी ई-संगोष्ठी में सम्मिलित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/नवीन जोशी/मुकुंद-hindusthansamachar.in