एम्स में नहीं मिल पा रहा मरीजों को माकूल उपचारः विजय सारस्वत
एम्स में नहीं मिल पा रहा मरीजों को माकूल उपचारः विजय सारस्वत
उत्तराखंड

एम्स में नहीं मिल पा रहा मरीजों को माकूल उपचारः विजय सारस्वत

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देहरादून, 10 सितम्बर (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस महामंत्री संगठन विजय सारस्वत ने राज्य की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर तंज कसते हुए कहा कि ऋषिकेश एम्स कोरोना मरीजों के लिए मौत का कुंआ बनता जा रहा है। विश्व स्तरीय चिकित्सा का दावा करने वाले ऋषिकेश एम्स में कोरोना से संक्रमित मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है। गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में विजय सरस्वत ने पत्रकारों से बातचीत में राज्य की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यस्था को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग खुद मुख्यमंत्री के अधीन है लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे है। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं स्वास्थ्य सचिव आज तक अपने विकास के समय में से कुछ समय निकाल कर एम्स की व्यवस्थाओं का जायजा लेने नहीं जा पाये हैं। उन्होंने कहा कि एम्स में भर्ती मरीजों को न तो उनके तिमारदारों से वीडियो कान्फ्रेंसिग अथवा दूरभाष के माध्यम से वार्ता कराई जा रही है न ही एम्स द्वारा किसी प्रकार का स्वास्थ्य बुलेटिन जारी नहीं किया जा रहा है। विजय सारस्वत ने कहा कि राज्य सरकार की लापरवाही के कारण कोरोना ग्रसित मरीजों की मौत के आंकड़े दिन प्रतिदिन बढते जा रहे हैं। फण्ड जारी नहीं होने की वजह से 108 जैसी सेवा कई दिनों तक प्रदेश में ठप रही। इस वजह से कई मरीजों ने अपनी जांन गंवाई। राज्य सरकार सरकारी अस्पतालों को पीपीपी मोड पर दे रही है, जिससे उसका निकम्मापन उजागर हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस महामंत्री ने कहा कि कोरोना टेस्ट की जो फीस निर्धारित की गई है, गरीब आदमी उसे वहन करने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना टेस्ट निःशुल्क किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अन्य बीमारियों के उपचार के लिए एम्स की ओपीडी खुलवाई जानी चाहिए ताकि लोगों को सस्ती दरों पर इलाज कराने की सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्य चिकित्सालयों में भी डाॅक्टरों, चिकित्सा कर्मियों व सफाई र्कमचारियों की भारी कमी के चलते व्यवस्थायें चरमरा चुकी हैं। ऐसे में सभी चिकित्सालयों में डाॅक्टरों, चिकित्सा कर्मियों व सफाई र्कमचारियों की समुचित तैनाती की जानी चाहिए। विजय सारस्वत ने यह भी कहा कि प्रायः देखने में आ रहा है कि कोरोना संक्रमितों के लिए बनायेे गये कोविड वार्डों में चिकित्सक एव चिकित्सा कर्मियों के स्थान पर अटेन्डेंट को भेजा जा रहा है, जिससे मरीजों का मनोबल टूट रहा है तथा उनका स्वास्थ्य अच्छा होने की बजाय और बिगड़ रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/राजेश-hindusthansamachar.in