ऋषिकेश में गोपाष्टमी पर गायों की पूजा
ऋषिकेश में गोपाष्टमी पर गायों की पूजा
उत्तराखंड

ऋषिकेश में गोपाष्टमी पर गायों की पूजा

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ऋषिकेश, 22 नवम्बर (हि.स.)। तीर्थनगरी के सभी आश्रमों की गौशालाओं में गोपाष्टमी पर्व पर रविवार को गायों की पूजा कर उन्हें गो ग्रास खिलाया गया। मायाकुंड स्थित कृष्ण कुंज आश्रम की गौशाला में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णाचार्य ने कहा कि गोपाष्टमी भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है। गायों की रक्षा करने के कारण भगवान श्रीकृष्ण का नाम 'गोविन्द' पड़ा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से सप्तमी तक गो-गोप-गोपियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। तब से अष्टमी को गोपाष्टमी मनाई जाती है। सनातन संस्कृति में गाय का विशेष स्थान है। गाय को मां का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि जैसे मां का ह्रदय कोमल होता है, वैसे ही गाय माता का होता है। जैसे एक मां अपने बच्चो को हर स्थिति में सुख देती है, वैसे ही गाय भी मनुष्य जाति को लाभ प्रदान करती है। शिवानंद आश्रम हरिद्वार मार्ग पर स्थित गौशाला में स्वामी आत्मतृप्तानंद ने गोपाष्टमी के शुभ अवसर पर लोगों को गो पूजा के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने गोपाष्टमी पर गायों की पूजा कर यदि संभव हो तो उनके साथ कुछ दूर तक चलना चाहिए। कहते हैं, ऐसा करने से प्रगति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। गायों को भोजन कराना चाहिए तथा उनकी चरण रज को मस्तक पर लगाना चाहिए। ऐसा करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। षड्दर्शन साधु समाज के अध्यक्ष महंत गोपाल गिरी ने श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंग सुनाए। इस दिन गाय की पूजा की जाती हैं। हिन्दुस्थान समाचार /विक्रम/मुकुंद-hindusthansamachar.in