उन्नीस साल बाद मिला इंसाफ, बनेंगे दरोगा
उन्नीस साल बाद मिला इंसाफ, बनेंगे दरोगा
उत्तराखंड

उन्नीस साल बाद मिला इंसाफ, बनेंगे दरोगा

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नैनीताल, 02 सितम्बर (हि.स.)। नैनीताल हाईकोर्ट से साल 2001 की पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी को अब इंसाफ मिल पाया है। हाईकोर्ट ने नियुक्ति न देने पर कड़ा रुख अपनाते हुए निकट भविष्य में होने वाली भर्ती में एक पद इस अभ्यर्थी के लिए आरक्षित रखने का आदेश सरकार को दिया हैं। हाईकोर्ट ने सरकार की स्पेशल अपील को खारिज कर दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। यह याचिका जितेंद्र जोशी ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उसने 2001 में दरोगा भर्ती के लिए लिखित परीक्षा पास की। इसके बादशारीरिक परीक्षा में सफल हुआ। उसे इंटरव्यू में बुलाया गया। इसमें उसे 40 में से केवल 7 नंबर दिए गए। अन्य उम्मीदवारों के नंबर 22 से अधिक थे। इस कारण उसका नाम मेडिकल के लिए बुलाये गए अभ्यर्थियों की सूची में नहीं था। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी का उम्मीदवार था। इस वर्ग के लिये आरक्षित पांच पदों के लिए छह उम्मीदवार मेडिकल के लिये बुलाये गए। मगर एक उम्मीदवार मेडिकल के लिए नहीं पहुंचा। इस कारण उसका चयन होना स्वभाविक था। याचिका में मेरिट सूची में कई अन्य गड़बड़ियों की भी जानकारी दी गई थी। इस प्रकरण पर कई अन्य अभ्यर्थियों ने कोर्ट की शरण ली थी और दरोगा भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच हुई। पूर्व में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपना प्रत्यावेदन सरकार को देने को कहा था। सरकार ने उसका प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया। इसके बाद उसने पुनः हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 27 मई 2020 को एकलपीठ ने आदेश पारित कर सरकार को याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने के आदेश दिए। इस आदेश के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ के समक्ष स्पेशल अपील की। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए भविष्य में होने वाली भर्ती में एक पद याची के लिये रिक्त रखने के आदेश दिए हैं। हिन्दुस्थान समाचार/लता नेगी/मुकुंद-hindusthansamachar.in