उत्तराखंड विधानसभाः सदन में उठा कोरोना काल में बंद ढाबों और होटलों के पानी के बिलों का मुद्दा
उत्तराखंड विधानसभाः सदन में उठा कोरोना काल में बंद ढाबों और होटलों के पानी के बिलों का मुद्दा
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उत्तराखंड विधानसभाः सदन में उठा कोरोना काल में बंद ढाबों और होटलों के पानी के बिलों का मुद्दा

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देहरादून, 23 दिसम्बर (हि.स.)। उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को भोजनावकाश से पहले सदन में प्रश्नकाल हुआ। उसके बाद शून्यकाल और कार्य स्थगन का लगभग आधा कार्य निपट गया। कार्य स्थगन के रूप में प्रीतम सिंह पंवार ने लॉकडाउन के दौरान बंद रहे ढाबे और होटलों का मुद्दा उठाते हुए उनके उस दौरान के पानी के बकाया बिलों को माफ करने की मांग की। इस पर सरकार ने अवगत कराया कि उस समय उस दौरान वार्षिक बढ़ोतरी में 6 प्रतिशत की कमी की गई थी, जिसे मार्च से 3 महीने तक इसको बढ़ाया भी गया था। ताकि किसी का बकाया हो तो उसका कनेक्शन विच्छेदन न किया जा सके। इसके साथ ही सरकार ने यह भी निर्णय किया कि इस तरह के मामलों में छूट देनी है कि नहीं, इस पर पेयजल की जो समिति बनी है, वह निर्णय करेगी। केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन से संबंधित एक विषय आज आया, जिसके बारे में सरकार ने उत्तर दिया कि विभिन्न संगठनों के माध्यम से वार्ता हुई है। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार को उनकी भावनाओं से पहले ही अवगत कराया जा चुका है। दोबारा फिर से अवगत करा दिया जाएगा। एक अन्य मामला धारचूला के विधायक हरीश धामी ने उठाया। धामी ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में कई सालों से रहने वाले लोगों को भूमि का मालिकाना हक दे दिया जाए। इस पर सरकार ने अवगत कराया कि वर्ग 3 और वर्ग 4 की भूमि पर रहने वालों को मालिकाना हक हम दे रहे हैं। इसे विधायक ने माना भी। इसके अलावा यह भी सहमति बनी कि जो लोग प्रतिबंधित भूमि पर रह रहे हैं, मसलन गोचर या वन भूमि पर रह रहे हैं अथवा नहीं रह रहे हैं, तो उसका सत्यापन कराकर उस पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। इस पर भी धामी ने सहमति जताई। इससे अलग आज विशेषाधिकार के रूप में काजी निजामुद्दीन ने किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इकबालपुर सरकारी चीनी मिल की ओर से मंगलवार को सदन में जानकारी दी गई थी कि मिल ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है लेकिन अभी भी 10 करोड़ रुपये का किसानों का भुगतान बकाया है। इस बारे में सरकार द्वारा चीनी मिल से जानकारी मांगने पर मिल ने गन्ना समिति को किए गए भुगतान का साक्ष्य भी भेजा, जिसमें शत-शत भुगतान किया गया था। इस पर काजी निजामुद्दीन का कहना था कि किसानों के बैंक खातों में गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान नहीं पहुंचा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मिल भी अपनी जगह सही है और काजी निजामुद्दीन ने जो सवाल उठाया है वह भी अपनी जगह सही है। चूंकि मिल सीधे किसानों को भुगतान नहीं करके गन्ना समितियों को भुगतान करती है और समिति से किसानों तक पैसा पहुंचने में समय लगना स्वाभाविक है। एक मामला कार्य स्थगन 310 के रूप में चार-पांच मुद्दों को लेकर पेश किया गया, जिनमें छात्रवृत्ति, सीबीआई इंक्वायरी, एनएच-74 आदि से जुड़े थे। उन पर कार्य संचालन की कार्य नियमावली के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा कराने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि जिन मामलों में जांच या अदालती प्रक्रिया जारी हो, उन पर सदन में चर्चा नहीं कराई जा सकती है। हिन्दुस्थान समाचार/दधिबल/मुकुंद-hindusthansamachar.in