अगली बार धरती नहीं आकाश बनूंगी: स्वाति
अगली बार धरती नहीं आकाश बनूंगी: स्वाति
उत्तराखंड

अगली बार धरती नहीं आकाश बनूंगी: स्वाति

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नैनीताल, 07 सितम्बर (हि.स.)। ‘अगली बार धरती नहीं आकाश बनूंगी, दूर से ही देखूंगी तुम्हें। देखूंगी कैसे ठिठुरते हो ठंड में या गर्मी में हांफते से फड़कते हो। स्वयं में पेड़ उगाकर जो न दूं छांव तो कैसे झुलसते हो तेज दुपहरी धूप में। ‘अगली बार’ शीर्षक से कविता की यह पंक्तियां चर्चित कवयित्री स्वाति मेलकानी ने कुमाऊं विश्वविद्यालय की रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजन पीठ द्वारा फेसबुक लाइव के जरिए आयोजित ऑनलाइन कविता-पाठ में प्रस्तुत की। वहीं ‘बुरांश’ शीर्षक कविता से कविता-पाठ की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, बुरांश के खिलने से जंगल खिल उठता है। बुरांश आशा है आज के सूरज के वर्षों तक उगने की और अंधेरी रातों में तारों और जुगनू के कभी न बुझने की। बुरांश का खिलना एक भरोसा है कि हवा में पानी, पानी में जीवन और जीवन में प्रेम अब भी शेष है। बुरांश प्रतीक है संभावनाओं का। स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लोहाघाट (चम्पावत) के शिक्षा शास्त्र विभाग में सहायक प्राध्यापक स्वाति मेलकानी ने इसके अलावा लड़कियों की आजादी और सपनों को केंद्र में रखकर लिखी कविता ‘एक खिड़की’ सुनाते हुए कहा, एक ऐसी खिड़की जरूर बनाना घर में जो तुम्हारी पहुंच में हो और जिसे तुम अपनी मर्जी से खोल सको। जब तुम्हारी सांसें फूलने लगती हैं तो उस खिड़की से होकर ताजी हवा आ सके तुम तक और तुम महसूस कर सको कि हवा में तुम्हारा भी हिस्सा है। इसके अलावा उन्होंने तीर्थयात्रियों पर हुए आतंकी हमले को केंद्र में रखकर लिखी कविता ‘अमरनाथ-2017’ तथा भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा अनुशंसित एवं प्रकाशित अपने कविता संग्रह ‘जब मैं जिंदा होती हूं’ से ‘खोजूंगी तुम्हें’, ‘पिक्चर अभी बाकी है’ गत वर्ष पिथौरागढ़ में पुस्तकों के लिए छात्रों द्वारा चलाए गए आंदोलन पर केंद्रित ‘पिथौरागढ़ किताब आंदोलन के नाम’, 15 जुलाई 2016 को फ्रांस के नीस शहर में उत्सव मनाती भीड़ को ट्रक से रौंदे जाने की घटना पर केंद्रित ‘मातम’, पहाड़ में पलायन की समस्या पर ‘लौट आओ’ सहित ‘मुक्ति’, ‘तुम्हारे लिए तुम्हारे आने से पहले’, ‘तुम और मैं’, ‘शहर से गुजरते हुए’, ‘ज्वालामुखी’ और ‘मुझे खोज है त्रास की’ कविताओं का पाठ भी किया। कार्यक्रम में महादेवी वर्मा सृजन पीठ के निदेशक प्रो. शिरीष कुमार मौर्य, शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत सहित वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’, हरीश चन्द्र पांडे, जगदीश जोशी, दिवा भट्ट, गीता गैरोला, जहूर आलम, जितेन्द्र श्रीवास्तव, शैलेय, हरि मृदुल, दिनेश कर्नाटक, रेखा चमोली, उदय किरौला, महाबीर रंवाल्टा व अनिल कार्की सहित बड़ी संख्या में साहित्य-प्रेमी सम्मिलित हुए। हिन्दुस्थान समाचार/नवीन जोशी/मुकुंद-hindusthansamachar.in