रोग से निपटने के लिए योग सबसे बड़ा आत्मबल : योग गुरु

रोग से निपटने के लिए योग सबसे बड़ा आत्मबल : योग गुरु
yoga-is-the-biggest-self-power-to-deal-with-disease-yoga-guru

बांदा, 20 जून (हि.स.)। वर्तमान समय समाज भय, रोग एवं अशांति के वातावरण से गुजर रहा है।इस समय हमें योग साधना की आवश्यकता है। अधिकांश लोग सर्प के काटने से नही उसके भय से मर जाते हैं, इसलिए किसी रोग के हो जाने पर सबसे पहले आत्मबल या सकारात्मक सोच की आवश्यकता है और यह केवल नियमित योगाभ्यास से प्राप्त हो सकता है। यह बात आज बांदा के योग गुरु गंगा शरण त्रिपाठी ने एक भेट के दौरान कही। वह बताते हैं कि, यदि हम नियमित योगाभ्यास एवं भोजन सुधार तथा प्रकृति के सानिध्य में रहे तो निश्चित रूप से अखंड स्वास्थ्य, शक्ति, आनंद, ज्ञान एवं प्रेम प्राप्त कर सकते हैं। समाज को इन पांचों स्तंभों की नितांत आवश्यकता है। हम बिना भोजन के कुछ दिन जीवित रह सकते हैं तथा बिना जल के भी कुछ क्षण जीवित रह सकते हैं परंतु बिना ऑक्सीजन के एक क्षण भी जीवित नही रह सकते इसलिए यह बात सिद्ध होती है हमें भोजन से भी ज्यादा प्राणायाम की आवश्यकता है। नेति क्रिया का विशेष महत्व योग गुरु श्री त्रिपाठी बताते हैं कि गांव में श्रम करने वाले लोगों को प्राणायाम स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता है अतः वह का स्वस्थ रहते हैं।स्वसन तंत्र को स्वस्थ रहने के लिए यौगिक षटकर्म नेति क्रिया का विशेष महत्व है।नेतिक्रिया के चार भाग हैं वह नेतिक्रिया के बारे में बताते हैं कि अगर घृत नीति सूत्र नेति ,जल नेति ,नासा पान। किसी कुशल योग प्रशिक्षक से उपरोक्त क्रियाओं को सीख लिया जाए तो निश्चित रूप से श्वशन संबंधी रोगों से लड़ने की शक्ति अर्थात रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ेगी क्योंकि नासिका स्वरों का बंद रहना भी ऑक्सीजन लेवल का संतुलन बिगाड़ देता है। योग गुरु के मुताबिक कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए मास्क, समाजिक, दूरी तथा स्वच्छता आदि अति आवश्यक है जिससे हम विषाणु से बचे रहेंगे लेकिन उतना ही हमारे लिए योगाभ्यास आवश्यक है।इससे आपके ऊपर रोग का आक्रमण होने से बचा होगा अर्थात योग जीवन शैली वह संजीवनी हैं जो आपको हर रोग से बचाने की शक्ति प्रदान करता है। पशु पक्षी भी करते हैं योग वे कहते हैं कि योग का वर्णन सभी धार्मिक ग्रंथों में मिलता है कालांतर में महर्षि पतंजलि के योग दर्शन के रूप में समाज के सामने आई ।व्यास वाचस्पति नागेश, विज्ञान भिक्षु जैसे ग्रंथ कारों की रचनाओं से भी योग की पुष्टि होती है। यम, नियम, आसन प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान समाधि यह अष्टांग योग के आयाम है।अधिकांश लोग योग को आसनों तक ही सीमित रखते हैं जिसके कारण योग का पूर्ण लाभ नहीं मिलता है। वह बताते हैं कि कई आसन पशु पक्षियों से लिए गए हैं जैसे शलभासन, मयूरासन, भुजंगासन आदि इससे यह बात सिद्ध होती है कि स्वस्थ रहने के लिए पशु पक्षी भी योग करते हैं लेकिन आज समाज अनावश्यक भोगों की ओर जा रहा है जिससे शारीरिक एवं मानसिक रोग पैदा होते हैं। शारीरिक एवं मानसिक रोगों का उपचार योग से ही प्राप्त किया जा सकता है। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल

अन्य खबरें

No stories found.