निर्माण को तैयार विंध्य कारिडोर, शासन को भेजा प्रस्ताव

निर्माण को तैयार विंध्य कारिडोर, शासन को भेजा प्रस्ताव
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सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट को सपनों सरीखा बनाने के लिए प्रशासन ने झोंकी पूरी ताकत ध्वस्तीकरण प्रक्रिया तेज, अब निर्माण शुरू होने का इंतजार मीरजापुर, 22 मई (हि.स.)। विंध्यधाम के सौंदर्यीकरण व चतुर्दिक विकास के आसार एक बार फिर जगे हैं। सीएम योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट विंध्य कारिडोर अब निर्माण को तैयार है। निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए शनिवार को जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने शासन को प्रस्ताव भेजा। शासन से हरी झंडी मिलते ही सबसे पहले परिक्रमा पथ का निर्माण कराया जाएगा। परिक्रमा पथ व गलियों की चौड़ीकरण के लिए सम्पत्तियों की खरीदारी लगभग पूर्ण हो चुकी है। अब बस निर्माण शुरू होने का इंतजार है। अक्टूबर 2020 में विंध्य कारिडोर योजना को कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद अधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई। इसके बाद शासन की ओर से पर्यटन विभाग के सचिव शिवपाल सिंह को विंध्य कारिडोर का नोडल अधिकारी नामित किया गया। काफी विरोध के बाद आखिरकार निर्माण शुरू होने तक कारिडोर पहुंच ही गया। फरवरी माह के अंत तक विंध्य कारिडोर के शिलान्यास की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद 14 मार्च को पूर्वांचल दौरे पर निकले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद विंध्यधाम पहुंचे। उनके साथ मुख्यमंत्री भी थे। विंध्यवासियों को लगा कि विंध्य कारिडोर के शिलान्यास की घड़ी आ चुकी है, लेकिन कारिडोर का शिलान्यास नहीं हो सका। हालांकि मुख्यमंत्री ने देश के प्रथम नागरिक को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट विंध्य कारिडोर की बारीकियों से अवगत कराया। वहीं राष्ट्रपति ने विंध्य कारिडोर के कार्य को देख मुख्यमंत्री को प्रशंसित नजरों से देखा। हालांकि विंध्य कारिडोर को अब भी शिलान्यास का इंतजार है। जिला प्रशासन से विंध्य कारिडोर का निर्माण शुरू करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। जल्द ही कारिडोर निर्माण शुरू होने की संभावना है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद विंध्यधाम के सौंदर्यीकरण में अब और तेजी आएगी। सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट को सपनों सरीखा बनाने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक रखी है। पूरा देश कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है, लेकिन विंध्यधाम के कायाकल्प का काम थमा नहीं है। ऐसा इसलिए कि इसी साल अक्टूबर तक काम पूरा करने का टारगेट है। विंध्यवासिनी मंदिर, जो पावन गंगा नदी किनारे स्थित है। पहले यह पूरा प्रांगण सकरी गलियों से घिरा हुआ था। विंध्य कारिडोर के अंतर्गत जैसे-जैसे परिसर के बाहरी हिस्सों को ध्वस्त किया जाता रहा, विंध्यधाम का स्वरुप स्पष्ट नज़र आता गया। परिक्रमा पथ व गलियों की चौड़ीकरण के लिए सम्पत्तियों की खरीदारी लगभग पूर्ण 50 फीट परिक्रमा पथ निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपये से 92 में से 86 सम्पत्तियों की खरीदारी की गई। सभी का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है। इसमें छह भवन सरकारी थे, इसका ध्वस्तीकरण होना है। न्यू वीआईपी, पुरानी वीआईपी, पक्का घाट, थाना कोतवाली गली के चौड़ीकरण के लिए 33.70 करोड़ आया था। इसमें 206 सम्पत्ति थी। इसमें 183 सम्पत्तियों की खरीदारी की जा चुकी है। सभी का ध्वस्तीकरण हो चुका है। न्यू वीआईपी रोड पर 23 सम्पत्ति की रजिस्ट्री होना बाकी है। कोतवाली गली से हनुमान तिराहा तक 35 फीट चौड़ा किया जाना है। इसके लिए 27.35 करोड़ रुपये आया था। इसमें 165 सम्पत्ति में से 156 का रजिस्ट्री किया जा चुका है। नौ सम्पत्ति बचा है, ध्वस्तीकरण जारी है। गुलाबी पत्थरों से बनेगा विंध्य कारिडोर का पाथ-वे विंध्य कारिडोर के पाथ-वे का निर्माण अहरौरा के गुलाबी पत्थरों से कराया जाएगा। प्रदेश सरकार के निर्देश पर विंध्य कारिडोर के नोडल अधिकारी पर्यटन विभाग के सचिव शिवपाल सिंह ने विंध्य कारिडोर के पाथ-वे एवं गलियों के चौड़ीकरण के लिए लगभग दस करोड़ रुपये के गुलाबी पत्थरों का उपयोग किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इन पत्थरों की आपूर्ति के लिए अहरौरा के खनन व्यवसाइयों को आपूर्ति करने का आदेश दे दिया है। कहा है कि विंध्य कॉरिडोर के लिए आवश्यक गुलाबी पत्थरों की कटिंग कर स्टोर कर लिया जाए, ताकि निर्माण कार्य शुरू कराए जाने पर तत्काल आपूर्ति किया जा सके। इससे केंद्र सरकार के लोकल फार वोकल अभियान को गति मिलेगी। मंदिर के आसपास छोटे-बड़े मंदिरों का होगा जीर्णोद्धार विंध्याचल मंदिर विश्व विख्यात हिंदुओं का तीर्थ स्थल है। मंदिर के आसपास छोटे-बड़े मंदिर, कुंड व पुराने जमाने की विरासत मौजूद है। इसे सुरक्षित करने के लिए उन सभी जगहों का पुनः जीर्णोद्धार होगा। परिक्रमा पथ से लेकर विंध्याचल मंदिर का कायाकल्प के लिए योजना तैयार हो चुकी है। गंगा घाट का भी रास्ता मंदिर से होकर जाएगा। विंध्यधाम को अलौकिक तरीके से सजाया जाएगा। यहां आने वाले पर्यटकों को तंग बदहाल गलियों से नहीं गुजरना पड़ेगा। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त