उप्र : बक्सवाहा के जंगल को बचाइए, हमें हीरा नहीं 'ऑक्सीजन' चाहिए

उप्र : बक्सवाहा के जंगल को बचाइए, हमें हीरा नहीं 'ऑक्सीजन' चाहिए
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'वृक्षपुरुष' ने जंगल बचाने के लिए राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से की अपील बक्सवाहा के जंगल को बचाने के लिए छेड़ी मुहीम भदोही, 22 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के छतरपुर इलाके में बक्सवाहा जंगल को बचाने के लिए 'वृक्षपुरुष' एवं शिक्षक अशोक कुमार गुप्ता ने राष्ट्रपति को पत्र भेज कर अपील की है कि, इसे कटने से रोका जाय। पूरे देश में पर्यावरण संरक्षक सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। क्योंकि इस फैसले से ढाई लाख वृक्ष काट दिए जाएंगे। यह मामला ट्वीटर पर भी खूब ट्रेंड किया है। सरकार ने हीरा निकालने के लिए इसे एक निजी कंपनी को दिया है। जिले के पर्यावरण संरक्षक एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक अशोक कुमार ने इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण एवं संतुलन के लिए हमें लड़ना होगा। प्रकृति के साथ खिलवाड़ हुआ है, उसी का परिणाम आज हम भुगत रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी एवं पर्यावरण असंतुलन को देखकर एक तरफ सरकार वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रही है वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में 2.5 लाख वृक्षों को काटने का फरमान जारी कर रखा है। इस मुहिम के लिए संपूर्ण भारत के पर्यावरण विदों ने एक साथ जनांदोलन छेड़ रखा है ताकि जंगल को बचाया जा सके। शिक्षक अशोक कुमार गुप्ता द्वारा विगत 4 वर्षों से हर दिन वृक्षारोपण कर पर्यावरण को संतुलित करने का भगीरथ प्रयास किया जा रहा है। उनका दावा है कि मध्य प्रदेश की सरकार छतरपुर जिले के बक्सवाहा जंगल में हीरा खनन के लिए एक निजी कंपनी को 50 वर्षों के लिए बक्सवाहा का जंगल लीज पर दिया है। जिसमें ढाई लाख वृक्षों से आच्छादित जंगल को काटने का फैसला लिया गया है। इस सम्बंध में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अशोक कुमार गुप्ता ने राष्ट्रपति के साथ-साथ प्रधानमंत्री एवं पर्यावरण मंत्री को पत्र भेजकर बक्सवाहा के जंगल को नष्ट होने से बचाने की अपील की है। अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि एक साथ लाखों पेड़ों को एक साथ काट दिया गया तो ऑक्सीजन का लेवल निम्न से निम्नतम स्तर पर चला जाएगा। इसके साथ ही साथ जंगल में रहने वाले जीवों के प्राणों पर भी संकट आ जाएगा। हीरा सबको नहीं चाहिए किंतु ऑक्सीजन सबको चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार /प्रभुनाथ/विद्या कान्त

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