फर्जी मार्कशीट बनाने वाले शिक्षा पद्धति को नुकसान व सामाजिक ढांचे को कर रहे पंगु - हाईकोर्ट

फर्जी मार्कशीट बनाने वाले शिक्षा पद्धति को नुकसान व सामाजिक ढांचे को कर रहे पंगु - हाईकोर्ट
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फर्जी मार्कशीट के आधार पर 11 वर्ष से नौकरी कर रहे प्राइमरी टीचर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज प्रयागराज, 11 जून (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर 11 वर्ष से प्राइमरी स्कूल में नौकरी कर रहे टीचर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दिया। अग्रिम जमानत देने से इन्कार करते हुए कोर्ट ने कहा कि फर्जी मार्कशीट बनाने वाले रैकेट सामाजिक ढांचे को पंगु बना रहे हैं और शिक्षा पद्धति के जड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। टीचर पर आरोप है कि उसने आगरा विश्वविद्यालय से बीएड की फर्जी मार्कशीट के आधार पर टीचर नियुक्त हुआ और वर्ष 2009 से पढ़ा रहा था। फर्जी मार्कशीट को लेकर इसके खिलाफ थाना अहमदगढ़, बुलंदशहर में मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमा भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 के अन्तर्गत दर्ज कराया गया है। इस मुकदमे में याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत की मांग की थी। याची के वकील का कहना था कि इस मार्कशीट को पाने में उसका कोई दोष नहीं है। उसे नहीं मालूम था कि उसका मार्कशीट फर्जी है। जबकि अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता विनोद कान्त का कहना था कि यूपी में बिचौलियों के मार्फत फर्जी मार्कशीट बनाने व देने का रैकेट चल रहा है। याची कई वर्षों तक फर्जी मार्कशीट का लाभ लेता रहा है। वह यह नहीं कह सकता कि उसे फर्जी मार्कशीट का ज्ञान नहीं था। याची टीचर सुनील कुमार की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल ने कहा कि याची कोर्ट में अपने को सरेन्डर करे और विवेचना में सहयोग करे। कोर्ट ने कहा कि फर्जी मार्कशीट बनाने वालों के रैकेट में बिचौलियों, मास्टरमाइंड व लाभार्थियों की लम्बी चेन है। इसके जड़ों तक जाने के लिए जाँच जरूरी है। ऐसे मामलों में जाँच के लिए कस्टडी कभी-कभी जरूरी हो जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/विद्या कान्त