गरीब को जकात अदा कर बताने की जरूरत नहीं : मुफ्ती कासमी

गरीब को जकात अदा कर बताने की जरूरत नहीं : मुफ्ती कासमी
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- रमजान मुबारक की 20 वीं तारीख को सूर्यास्त से थोड़ी देर पहले मस्नून ऐतकाफ शुरू होता है कानपुर,29 अप्रैल (हि.स.)। रमजान के पवित्र माह पर रब के बताए गए तरीको के साथ उसमे किसी तरह की कोताही न हो। रोजे और इबादत के जरिए हम अपने रब को राजी करले। उसके बनाये हुए नियमों का उल्लंघन ना हो। इसको लेकर रोजेदार शरीयत हेल्पलाइन से रोजाना सवाल पूछ रहे हैं और उनको माकूल जवाब मिल रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को सवालों के सही जवाब कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी कानपुर के जरिए अल-शरिया हेल्पलाइन से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के दौरान मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी ने जवाब दिए। कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी कानपुर की अल-शरिया हेल्पलाइन से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर। प्रश्न:-गरीब व्यक्ति कर्ज ली हुई रकम वापस नहीं कर सका और ना ही उम्मीद है तो क्या मैं उस रक़म पर जकात की नियत करके उसे छोड़ दूं, क्या इस तरह से जकात अदा हो जायेगी? उत्तर:- इस सूरत में जकात अदा नहीं होगी क्योंकि जिस वक्त आपने उसे रूपया दिया था उस वक्त आपकी नियत कर्ज की थी, जकात की नहीं। प्रश्न:- मैं इशा की नमाज में उस वक्त पहुंचा जब फर्ज नमाज हो चुकी थी और तरावीह की जमाअत हो रही थी, मैं तरावीह में शामिल हो गया और इशा के फर्ज को तरावीह के बाद अदा किया तो क्या मेरी नमाज हो गयी? उत्तर:- आपकी तरावीह की नमाज अदा नहीं हुई, आपको पहले फर्ज नमाज और दो रकअत सुन्नत पढ़ लेना चाहिए, फिर तरावीह की नमाज में शिरकत करना चाहिए। प्रश्न :- जिसको जकात दी जाये, क्या उसको बताना जरूरी है कि यह जकात की रकम है ? उत्तर:- किसी गरीब को जकात की नियत से माल दे देना जकात अदा होने के लिये काफी है, उसको जकात बताने की जरूरत नहीं है, बल्कि हदिया (उपहार) आदि कहकर भी दे सकते हैं। प्रश्न:- मस्नून ऐत्तकाफ कब से कब तक है? उत्तर:- रमजान मुबारक की 20वीं तारीख को सूर्यास्त से थोड़ी देर पहले मस्नून ऐत्तकाफ शुरू होता है और जब ईद का चांद नजर आ जाये, उस वक्त मस्नून ऐत्तकाफ मुकम्मल हो जाता है। प्रश्न:- एक व्यक्ति रोजा रखने की क्षमता नहीं रखता, क्या वह ऐत्तकाफ कर सकता है? उत्तर:- मस्नून ऐत्तकाफ के लिये रोजा शर्त है, इसलिये उस शख्स का ऐत्तकाफ नफिली होगा, मस्नून ऐत्तकाफ नहीं होगा। हिन्दुस्थान समाचार/महमूद/मोहित