प्रदेश सरकार ने डायग्नोस्टिक केन्द्रों की जाँच शुल्क तय कर हाईकोर्ट में प्रस्तुत की रिपोर्ट

प्रदेश सरकार ने डायग्नोस्टिक केन्द्रों की जाँच शुल्क तय कर हाईकोर्ट  में प्रस्तुत की रिपोर्ट
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सीटी स्कैन के सभी स्लाइस का 2,500 अधिकतम शुल्क प्रयागराज, 27 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में डायग्नोस्टिक सेन्टरों द्वारा की जा रही जाँच पर ली जाने वाली अधिकतम फीस निर्धारित कर हाईकोर्ट को आज अपनी रिपोर्ट सौंप दी। अब डायग्नोस्टिक सेन्टरों द्वारा आरटीपीसीआर टेस्ट का शुल्क 500-900 तथा एन्टीजेन टेस्ट का शुल्क 200 रूपया लिया जाएगा। इसी प्रकार सीटी स्कैन के अलग-अलग स्लाइस की जाँच रिपोर्ट का शुल्क अधिकतम दो हजार से शुरू होकर 2500 रूपया तय किया गया है। हाईकोर्ट ने भी सरकार की इस कार्रवाई पर संतुष्टि प्रकट की है। प्रदेश सरकार ने यह कार्रवाई हाईकोर्ट द्वारा विगत पारित आदेश के क्रम में किया है। कोर्ट ने सरकार को कहा था कि वह डायग्नोस्टिक सेन्टरो द्वारा जाँच के नाम पर वसूले जा रहे मनमानी शुल्क की अधिकतम सीमा तय कर कोर्ट को बताए। सरकार ने कोर्ट को बताया कि डायग्नोस्टिक सेन्टरों द्वारा सीटी स्कैन के 16 स्लाइस तक 2000 रूपया तय किया गया है। इसके ऊपर 16 से 64 स्लाइस तक 2250 तथा 64 से ऊपर की स्लाइस पर 2500 चार्ज किया जाएगा। ट्रू नाट प्राइवेट टेस्टिंग का शुल्क 1200 निर्धारित किया गया है। हाईकोर्ट में कोर्ट के आदेश से गठित कमेटी ने हाईकोर्ट जज, जस्टिस वी के श्रीवास्तव की कोरोना से निधन के सम्बन्ध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। सरकार ने इस रिपोर्ट का अवलोकन करने की कोर्ट से मांग की। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए इस सम्बन्ध में कोई आदेश पारित नहीं किया और इस रिपोर्ट को रिकार्ड में रखने का निर्देश दिया। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट द्वारा पारित पिछले आदेश के अनुपालन में बहराइच, बिजनौर, श्रावस्ती, बाराबंकी व जौनपुर में चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत की। कोर्ट ने इन जिलों में चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर करने के सरकार की रिपोर्ट को देखा और प्रशंसा की। परन्तु हाईकोर्ट ने कहा कि इसी प्रकार की चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर करने की आवश्यकता भदोही, गाजीपुर, बलिया, देवरिया व शामली जिलों में भी है। कोर्ट ने इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई की तिथि पर इन जिलों में भी चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर करने की सरकार से रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा व न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने कोरन्टाइन केन्द्रों की खराब स्थिति को लेकर स्वतः कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट अब इस जनहित याचिका पर 7 जून को सुनवाई करेगी। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/विद्या कान्त

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