देश की स्वतंत्रता लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं के बलिदान की देन है : डॉ अशोक श्रोती

देश की स्वतंत्रता लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं के बलिदान की देन है : डॉ अशोक श्रोती
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- देश के युवाओं को महारानी की देशभक्ति और वीरता से प्रेरणा लेने की जरूरत है - डॉ अंशुमाली शर्मा झांसी,18 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय सेवा योजना बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी, पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ एवं महिला अध्ययन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस के अवसर पर 'महारानी लक्ष्मीबाई: काशी से झांसी' तक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अशोक श्रोती क्षेत्रीय निदेशक राष्ट्रीय सेवा योजना ने बताया कि रानी ने कहा था मैं देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दे सकती हूं, लेकिन अपनी झांसी कभी नहीं दूंगी। देश की स्वतंत्रता आज इन्ही वीरांगनाओं के बलिदान की देन है। हम अपने राष्ट्र के समर्पित रहने वाले नायकों के विशेष तिथियों को राष्ट्रीय पर्व मनाने की जरूरत है। राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य सम्पर्क अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार एवं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ अंशुमाली शर्मा ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने जिस तरह से झाँसी को बचाने के लिए अंग्रेजो से लड़ाई लड़ी, यह समाजहित और राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाता है। महारानी लक्ष्मीबाई का बलिदान इस बात का परिचायक है कि अपने समाज के प्रति अपने देश के प्रति और अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित रहे हैं। देश के हर युवा युवाओं को महारानी की देशभक्ति और वीरता से प्रेरणा लेनी चाहिए। पं. दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ के संयोजक डॉ मुन्ना तिवारी ने कार्यक्रम के विषय से अवगत कराते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई से झांसी का अस्तित्व है। वैश्विक स्तर पर रानी लक्ष्मीबाई ने अपने शौर्य और पराक्रम से पहचान दिलाई। अंग्रेजों से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी बहादुरी के किस्सों की तारीफ उनसे लड़ने वाले अंग्रेजों ने खुद की थी। भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम की नायिका रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और साहस को शायद ही कभी कोई भुला पाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अपर्णा राज ने कहा कि किसी की कभी भी सीखने की उम्र खत्म नहीं होती है। हमारा उद्देश्य अपने काम के प्रति समर्पित होना चाहिए। कार्यक्रम में एनएसएस नोडल अधिकारी ने डॉ उमेश कुमार ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता दिलाने में असंख्य वीरांगनाओं का योगदान रहा है। आज आवश्यकता है कि हम सभी देशवासी देश के महापुरुष और वीरांगनाओं के बताए मार्ग का अनुसरण करें। कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए डॉ अंचला पाण्डेय ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई अकेले होने के कारण अपनी झांसी नहीं बचा पाईं लेकिन देश को बचाने की बुनियाद खड़ी कर गई एक मार्ग दिखा गईं। कार्यक्रम का संचालन शाश्वत सिंह ने किया। इस अवसर पर एनएनएस की वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ श्वेता पाण्डेय, महिला अध्ययन केंद्र की सहसंयोजक डॉ नेहा मिश्रा, डॉ यतीन्द्र मिश्रा, डॉ. शुभांगी निगम, डॉ. बीएस मस्तनिया, ई. ब्रजेश लोधी, डॉ ओपी चैधरी एवं अन्य उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/महेश

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