क्रांति की उर्वर जमीन विचार तय करते हैं : प्रो हेरम्ब चतुर्वेदी

क्रांति की उर्वर जमीन विचार तय करते हैं : प्रो हेरम्ब चतुर्वेदी
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प्रयागराज, 24 मार्च (हि.स.)। केन्द्रीय सांस्कृतिक समिति, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से ’आजादी का संघर्ष और शहादत के मायने’ विषय पर विशेष व्याख्यान में प्रोफेसर हेरम्ब चतुर्वेदी ने कहा कि क्रांति की उर्वर जमीन विचार ही तय करते हैं। किसी भी क्रांति के पीछे एक विचारधारा जरूर होती है। बिना विचारधारा के क्रांति असम्भव है। इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होंने फ्रेंच रिवॉल्यूशन व भारत के 1857 स्वतंत्रता संग्राम का तुलनात्मक विश्लेषण किया। मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग में आयोजित व्याख्यान में प्रो. ललित जोशी ने कहा इतिहासकार को गौरव गाथा से खुद को बचाना चाहिए और ऐतिहासिक नायकों को भी इतिहासकार को एक समीक्षक की दृष्टि से ही देखना चाहिए। यथार्थ रूप में जो इतिहास दिखाई देता है उसके भीतर एक स्माल वॉइस ऑफ हिस्ट्री होती है जिसके सहारे वास्तविक इतिहास की पड़ताल की जा सकती है। प्रो. जोशी ने स्वाधीनता आंदोलन में बिरसा मुंडा से लेकर भगत सिंह से होते हुए असहयोग आंदोलन व भारत छोड़ो आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल इन्हीं सूत्रों के हवाले से की। उन्होंने भगत सिंह व वाचीनाथन के शहादत सम्बंधी मेनिफेस्टो की तुलनात्मक विवेचना भी की व स्पष्ट किया कि कैसे शहादत के भी अलग-अलग उद्देश्य हो सकते हैं। प्रो. जोशी ने कहा भगत सिंह की सबसे विशिष्ट बात यह है कि उन्होंने सिर्फ अंग्रेजों से भारत को मुक्ति दिलाने के लिए लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि जाति व्यवस्था, अंधविश्वास जैसी स्थितियों से भी भारत को मुक्ति दिलाने के लिए लड़ाई लड़ी जो उन्हें अन्य क्रांतिकारियों से अलग करती है। अंत में उन्होंने कहा कि भगत सिंह आज भी लोक स्मृति में एक नायक के रूप में इसलिए हैं क्योंकि उनका जीवन बिल्कुल पारदर्शी था। कार्यक्रम संयोजक केन्द्रीय सांस्कृतिक समिति, इविवि के अध्यक्ष प्रोफेसर संतोष भदौरिया रहे। संचालन डॉ.विनम्रसेन सिंह एवं अतिथियों का स्वागत प्रो. शबनम हमीद और डॉ. चितरंजन कुमार ने किया। स्वागत वक्तव्य इविवि भूगोल विभाग के प्रो. ए.आर सिद्दीकी ने किया। व्याख्यान की प्रस्तावना रखते हुए प्रो. संजय श्रीवास्तव ने शहादत के मूल अर्थ स्पष्ट किया। उन्होंने गांधी के अहिंसात्मक आंदोलन और भगत सिंह की विचारधारा का तुलनात्मक विश्लेषण भी किया और उसके माध्यम से स्पष्ट किया की आजादी के लिए दोनों ही विचारधाराओं की अपनी अलग-अलग अहमियत थी। धन्यवाद ज्ञापन डॉ.ज्योति मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में प्रो.अजय जैतली, प्रो.अर्चना चहल, डॉ. राहुल पटेल, डॉ.विक्रम हरिजन, डॉ.दीनानाथ मौर्य, डॉ.वीरेंद्र मीणा व इविवि के अन्य अध्यापक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त

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